पेयजल संकट पर कलेक्टर प्रतिभा पाल सख्त, बंद नल-जल योजनाएं तत्काल चालू करने के निर्देश !

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Sagar जिले में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) और जल निगम के कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जिले में पेयजल आपूर्ति किसी भी हालत में बाधित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि गर्मी के मौसम में पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शिकायतों के निराकरण में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।

कलेक्ट्रेट में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन पर लंबित पेयजल शिकायतों के निराकरण की धीमी गति पर नाराजगी जताई। उन्होंने जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और नगर निकायों के मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले की सभी पेयजल संबंधी शिकायतों का अगले तीन दिनों के भीतर संतुष्टिपूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि निर्धारित समय सीमा के बाद जिन क्षेत्रों में शिकायतें लंबित पाई जाएंगी, वहां सीधे संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में बंद पड़े हैंडपंपों और नल-जल योजनाओं को तत्काल चालू करने पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले में जितने भी हैंडपंप खराब या बंद पड़े हैं, उन्हें तुरंत मरम्मत कर चालू किया जाए। वहीं जो नल-जल योजनाएं बिजली संबंधी समस्याओं के कारण बंद हैं, वहां विद्युत आपूर्ति की दिक्कतों को तत्काल दूर किया जाए।

कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सिंगल फेज मोटरों की व्यवस्था की जाए। साथ ही पाइपलाइन के अंतिम छोर पर कैपिंग कर पानी के अनावश्यक बहाव को रोका जाए, ताकि प्रगतिरत योजनाएं भी चालू अवस्था में बनी रहें और लोगों को नियमित पानी मिल सके।

बैठक के दौरान कलेक्टर ने जल निगम के अधिकारियों से सख्त लहजे में पूछा कि “जो योजनाएं चालू हैं, वे बंद क्यों हो रही हैं?” और “पेयजल स्रोत फेल होने की स्थिति क्यों बन रही है?” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां भी पाइपलाइन बिछाने या जल स्रोतों में तकनीकी गैप हैं, उन्हें तत्काल दूर किया जाए। पाइपलाइन लीकेज की समस्याओं को भी प्राथमिकता से हल करने के निर्देश दिए गए, ताकि दूषित पानी की आपूर्ति रोकी जा सके और लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो।

नगर निगम को भी निर्देश दिए गए कि जहां पाइपलाइन बदलने की आवश्यकता हो, वहां तत्काल एमआईसी में प्रस्ताव रखकर कार्य शुरू कराया जाए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि शुद्ध और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

पेयजल योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए कलेक्टर ने ग्रामीण विकास विभाग और पीएचई के इंजीनियरों को संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। सागर और खुरई डिवीजनों की सभी पूर्ण और निर्माणाधीन योजनाओं का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो योजनाएं पूरी तरह चालू हालत में हैं, उन्हें तत्काल ग्राम पंचायतों को हैंडओवर किया जाए।

कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए कि जनपद पंचायतों के सीईओ और पीएचई के कार्यपालन यंत्री स्वयं मौके पर पहुंचकर योजनाओं का स्पॉट वेरिफिकेशन करें। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि योजनाएं केवल कागजों में नहीं बल्कि वास्तविक रूप से संचालित हो रही हैं और लोगों को उनका लाभ मिल रहा है।

तकनीकी अमले को निर्देशित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि जल संयंत्रों और नलकूपों की मोटरों को हमेशा कार्यशील स्थिति में रखा जाए। यदि किसी क्षेत्र में इंटेक वेल में पानी का स्तर कम होता है या जल संकट की स्थिति बनती है, तो उसकी जानकारी तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाए, ताकि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके।

उल्लेखनीय है कि जिले में पेयजल आपूर्ति की स्थिति पर कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल स्वयं लगातार निगरानी कर रही हैं। इसके लिए प्रतिदिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है। इन बैठकों में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विवेक के.वी., नगर निगम आयुक्त श्री राजकुमार खत्री, सिटी मजिस्ट्रेट श्री गगन बिसेन, पीएचई और जल निगम के अधिकारी, इंजीनियर, जनपद पंचायतों के सीईओ और सभी नगर निकायों के सीएमओ शामिल हो रहे हैं।

जिला प्रशासन का कहना है कि गर्मी के इस दौर में पेयजल संकट से निपटने के लिए सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। प्रशासन का प्रयास है कि जिले के अंतिम छोर तक शुद्ध और पर्याप्त पेयजल पहुंचे तथा किसी भी नागरिक को पानी के लिए परेशान न होना पड़े।

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