संत रविदास मंदिर परिसर निर्माण कार्यों का कलेक्टर प्रतिभा पाल ने किया निरीक्षण !

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सागर के बड़तूमा क्षेत्र में निर्माणाधीन संत रविदास मंदिर परिसर का Pratibha Pal ने आकस्मिक निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने परिसर में बन रहे आधुनिक ऑडिटोरियम, संग्रहालय, भक्त निवास और डॉरमेट्री भवनों का बारीकी से अवलोकन किया। कलेक्टर ने मंदिर परिसर के मॉडल को भी देखा और अधिकारियों से पूरे प्रोजेक्ट की तकनीकी जानकारी प्राप्त की।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्रीमती पाल ने निर्माण एजेंसी और अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय सीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि लगभग 101 करोड़ रुपये की लागत से 11 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा यह भव्य परिसर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं होगा, बल्कि देश-दुनिया के लोगों को संत शिरोमणि रविदास जी के जीवन दर्शन, उनकी विचारधारा और भारतीय संत परंपरा से परिचित कराने वाला महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र भी बनेगा।

कलेक्टर ने कहा कि संत रविदास केवल एक संत ही नहीं बल्कि महान समाज सुधारक और मानव समानता के संदेशवाहक थे। इस मंदिर और संग्रहालय के माध्यम से उनके जीवन मूल्यों, सामाजिक समरसता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परिसर का मुख्य उद्देश्य लोगों को समानता, भाईचारे और मानवता के संदेश से जोड़ना है।

संग्रहालय और ऑडिटोरियम भवन के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने विशेष रूप से आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संग्रहालय में संत रविदास के जीवन प्रसंगों और उनके विचारों को डिजिटल और दृश्य-श्रव्य माध्यमों के जरिए प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी भी उनके संदेशों को आधुनिक तरीके से समझ सके। इस दौरान उन्होंने आंतरिक साज-सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और दर्शकों की सुविधा से जुड़े कई सुझाव अधिकारियों को दिए।

कलेक्टर ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का निरीक्षण करते हुए परिसर में हवा, रोशनी और बुनियादी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि यह परिसर भविष्य में बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा, इसलिए सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित और सुविधाजनक होनी चाहिए।

निर्माण एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि मुख्य मंदिर का निर्माण नागर शैली में किया जा रहा है। विशेष बात यह है कि मंदिर निर्माण में लोहे का उपयोग नहीं किया जा रहा है। लगभग 66 फीट ऊंचे इस मंदिर को बंसीपहाड़पुर के लाल पत्थरों से तैयार किया जा रहा है। मंदिर के गर्भगृह, अंतराल मंडप और अर्धमंडप का निर्माण तेजी से जारी है। सड़क स्तर से लगभग 5 फीट ऊंचा फाउंडेशन तैयार किया जा चुका है और नक्काशीदार पत्थरों के 72 पिलर लगाए जा चुके हैं, जिन पर मंदिर का ऊपरी ढांचा तैयार किया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक के वी, एसडीएम अमन मिश्रा, निर्माण एजेंसी के वरिष्ठ इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य संबंधित कर्मचारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए आगामी बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए जलभराव रोकने और सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक उपाय सुनिश्चित करने को कहा।

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