छतरपुर में रिपोर्ट दर्ज न होने पर एसपी ऑफिस के बाहर धरना !

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छतरपुर जिले के महाराजपुर थाना क्षेत्र में एक परिवार पर कथित हमले और पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज नहीं किए जाने के विरोध में पीड़ित परिवार ने एसपी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। देर रात तक चले इस प्रदर्शन में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल रहे। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि गांव के दबंगों ने उनके परिवार पर लाठी-डंडों और कुल्हाड़ी से हमला किया, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज करने के बजाय उन्हें थाने से भगा दिया।

जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत गांव के पीछे कुछ लोगों द्वारा जुआ खेलने और शराब पीने के दौरान हुई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि रवि पाल नामक युवक शराब के नशे में पानी मांगने के बहाने उनके घर पहुंचा और नशे की हालत में घर में घुसने की कोशिश करने लगा। घर की महिला गुड्डी पटेल ने इसका विरोध किया, जिसके बाद दोनों के बीच कहासुनी और गाली-गलौज शुरू हो गई।

विवाद बढ़ने पर गुड्डी पटेल के बेटे आशीष और सतीश मौके पर पहुंचे और रवि पाल को वहां से जाने के लिए कहा। आरोप है कि इससे नाराज होकर रवि पाल ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद उसने अपने 10 से 15 साथियों को बुला लिया। पीड़ित परिवार का कहना है कि सभी लोग लाठी-डंडों और कुल्हाड़ी से लैस होकर पहुंचे और पूरे परिवार पर हमला कर दिया।

हमले में गुड्डी पटेल (38), आशीष पटेल (16), सतीश पटेल (15), ग्यासी पटेल (39), जानकी प्रसाद (24), कैलाश पटेल और नीरज पटेल (25) घायल हो गए। परिवार का आरोप है कि हमलावरों ने घर में घुसकर मारपीट की और जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गई।

घायल परिवार इलाज और शिकायत दर्ज कराने के लिए महाराजपुर थाने पहुंचा। पीड़ितों का आरोप है कि उनसे पहले पाल समाज के लोग थाने पहुंच गए थे और पुलिस ने उनकी शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज कर लिया। जब पटेल परिवार ने अपनी शिकायत दर्ज कराने की मांग की, तो पुलिस ने रिपोर्ट लिखने से इनकार कर दिया।

परिवार का आरोप है कि थाने के मुंशी ने उन्हें थाना प्रभारी से मिलने के लिए कहा, लेकिन टीआई ने उनसे मिलने से मना कर दिया और थाने से बाहर निकाल दिया। पीड़ितों का कहना है कि इसी दौरान आरोपी रवि पाल ने थाने की सीढ़ियों पर खड़े होकर गांव लौटने पर जान से मारने की धमकी भी दी।

पुलिस से निराश होने के बाद घायल परिवार देर रात जिला मुख्यालय स्थित एसपी कार्यालय पहुंचा और गेट के बाहर धरने पर बैठ गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जब तक एसपी स्वयं बाहर आकर उनकी बात नहीं सुनेंगे और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन नहीं देंगे, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।

धरने में करीब दो दर्जन से अधिक महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल रहे। देर रात तक प्रदर्शन जारी रहने के कारण पुलिस और प्रशासन में हलचल मच गई। सूचना मिलने पर सिटी कोतवाली थाना प्रभारी सतीश सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन पीड़ित परिवार कार्रवाई की मांग पर अड़ा रहा।

बाद में सीएसपी अरुण कुमार सोनी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से बातचीत की और निष्पक्ष जांच तथा उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया। अधिकारियों द्वारा समझाइश के बाद परिवार धरना समाप्त करने के लिए तैयार हुआ।

सीएसपी अरुण सोनी ने बताया कि प्रदर्शन कर रहे लोगों को मेडिकल परीक्षण और एमएलसी के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरी रिपोर्ट और जांच के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, रात करीब 10:10 बजे प्रदर्शन समाप्त हुआ और परिवार धरने से उठ गया।

इस घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर दोनों पक्षों की शिकायत दर्ज कर निष्पक्ष कार्रवाई की जाती, तो मामला इतना नहीं बढ़ता। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

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