Indore में इस बार ईद का पर्व सिर्फ धार्मिक उत्साह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक सौहार्द, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने वाला आयोजन बन गया। सदर बाजार स्थित ऐतिहासिक ईदगाह में हजारों नमाजियों की मौजूदगी में शहर काजी Dr. Ishrat Ali ने अपने संबोधन में कई अहम सामाजिक मुद्दों को उठाया। उन्होंने गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की, जिसका वहां मौजूद नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। इसके बाद शांतिपूर्ण और भाईचारे के माहौल में ईद की नमाज अदा की गई।
ईदगाह में सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ जुटने लगी थी। नमाज से पहले शहर काजी ने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि देश में आपसी प्रेम और सद्भाव बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि गाय को दूसरे समुदाय के लोग बेहद सम्मान और श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं। ऐसे में सभी समाजों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा,

“हम मांग करते हैं कि गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए, ताकि उसके कटने पर पूरी तरह रोक लग सके। मुसलमानों पर अक्सर आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन हमें सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ना होगा।”
शहर काजी के इस बयान के बाद ईदगाह में मौजूद हजारों लोगों ने हाथ उठाकर उनका समर्थन किया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए आकर्षण और चर्चा का केंद्र बन गया।
पानी बचाने की अपील
अपने संबोधन में काजी इशरत अली ने पर्यावरण और जल संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पानी सबसे बड़ी चुनौती बनने वाला है। इसलिए हर व्यक्ति को वर्षा जल संरक्षण की दिशा में काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोग यह सोचकर न बैठें कि केवल सरकार या प्रशासन ही इस दिशा में काम करेगा। समाज के हर व्यक्ति को अपने घर और मोहल्ले में बारिश के पानी को जमीन में उतारने के प्रयास करने चाहिए।
“पानी बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। यदि आज हम नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा।”
नशे के कारोबार पर जताई चिंता
शहर काजी ने इंदौर में बढ़ते नशे के कारोबार को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नशा समाज को खोखला कर रहा है और दुर्भाग्य की बात यह है कि इसमें समाज के कुछ लोग भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा,
“नशा बहुत बड़ी समस्या बन चुका है। इसे रोकने के लिए समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर काम करना होगा। युवाओं को नशे से दूर रखना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।”
उन्होंने यह भी बताया कि वे लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रहे हैं और प्रदेश सरकार के मंत्री Kailash Vijayvargiya भी इस विषय पर लगातार चिंता जताते रहे हैं।
50 साल पुरानी परंपरा बनी आकर्षण
इंदौर की ईद की सबसे खास बात वह परंपरा रही, जो पिछले लगभग 50 वर्षों से निभाई जा रही है। शहर काजी को उनके घर से ईदगाह तक लाने और वापस छोड़ने की जिम्मेदारी एक हिंदू परिवार निभाता है।
इस बार भी सत्यनारायण सलवाडिया और उनके परिवार ने शहर काजी का फूलों से स्वागत किया और उन्हें विशेष रूप से सजाई गई बग्घी में ईदगाह तक पहुंचाया।
यह परंपरा इंदौर की गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल मानी जाती है। हिंदू परिवार और मुस्लिम समाज के बीच इस तरह का अपनापन शहर की पहचान बन चुका है।
खंडवा में भी उठी मांग
Khandwa में भी ईद के मौके पर मुख्य ईदगाह सहित कई मस्जिदों में नमाज अदा की गई और देश की खुशहाली के लिए दुआ मांगी गई। यहां शहर काजी Syed Nisar Ali ने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि खंडवा के मुस्लिम समाज ने वर्षों से गोवंश की कुर्बानी नहीं की है और सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान किया है। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ नमाजियों को पौधे भी वितरित किए गए।
धीरेंद्र शास्त्री ने भी किया समर्थन
Dhirendra Krishna Shastri ने भी हाल ही में गाय को “राष्ट्र माता” घोषित करने की मांग को लेकर देशव्यापी अभियान की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि 27 जुलाई को देशभर में हस्ताक्षर अभियान और ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
इंदौर की यह ईद सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि इसने सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय एकता का संदेश देकर पूरे देश में एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया।