सागर में किसानों के लिए ई-टोकन प्रणाली अनिवार्य, खाद वितरण में पारदर्शिता और व्यवस्था सुधार की बड़ी पहल !

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जिले में किसानों को समय पर और सुगमता से उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण और सख्त व्यवस्था लागू की है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देश पर अब जिले के सभी निर्धारित खाद वितरण केंद्रों पर उर्वरक का वितरण केवल ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से ही किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इसके अलावा किसी भी अन्य पारंपरिक या वैकल्पिक तरीके से खाद का वितरण नहीं किया जाएगा।

इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य जिले में खाद वितरण के दौरान होने वाली भीड़, अव्यवस्था और अनियमितताओं को समाप्त करना है, ताकि किसानों को बिना किसी परेशानी के समय पर उर्वरक मिल सके। कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ई-टोकन प्रणाली का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

किसानों के लिए सरल डिजिटल व्यवस्था

राज्य सरकार द्वारा खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए ई-टोकन प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया गया है। इसके तहत किसान अब घर बैठे ही ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से खाद का टोकन प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए सरकार ने ई-विकास पोर्टल https://evikas.mpkrishi.mp.gov.in उपलब्ध कराया है, जहां किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार खाद की बुकिंग कर सकते हैं।

इस प्रणाली के तहत किसान को पहले पोर्टल पर लॉगिन करना होता है और यदि उसके पास फार्मर आईडी उपलब्ध है तो वह सीधे ई-टोकन बुक कर सकता है। टोकन बुक करने के बाद किसान को निर्धारित तिथि के भीतर अधिकतम तीन दिनों के अंदर संबंधित केंद्र से खाद का उठाव करना अनिवार्य होगा। यदि इस अवधि में खाद नहीं लिया गया तो टोकन स्वतः समाप्त हो जाएगा, हालांकि किसान दोबारा टोकन पुनः बुक कर सकता है।

फार्मर आईडी न होने पर भी सुविधा

जिन किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं है या जिनके भूमि रिकॉर्ड पूरी तरह से अपडेट नहीं हैं, उनके लिए भी व्यवस्था की गई है। ऐसे किसान पोर्टल पर उपलब्ध “फार्मर आईडी नहीं है” विकल्प का चयन करके अपने सभी खसरे दर्ज कर सकते हैं और उन्हें एसडीएम के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। अनुमोदन मिलते ही किसान ई-टोकन बुक कर सकते हैं।

इसी तरह वन पट्टाधारी किसान, मंदिर ट्रस्ट की भूमि पर खेती करने वाले किसान, सिकमी या बटाईदार किसान तथा मृत या अक्षम किसानों के मामलों में भी अलग-अलग विकल्प दिए गए हैं। इन सभी को आवश्यक दस्तावेज अपलोड करके एसडीएम से अनुमोदन लेना होगा, जिसके बाद ही वे ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से खाद प्राप्त कर सकेंगे।

पारदर्शिता और निगरानी पर जोर

कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शिता पर आधारित है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी किसान को खाद के लिए अनावश्यक कतारों में खड़ा न होना पड़े और वितरण प्रणाली में किसी प्रकार की गड़बड़ी या बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी भी वितरण केंद्र पर ई-टोकन प्रणाली के बाहर खाद वितरण की शिकायत मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

अतिरिक्त खाद की सुविधा भी उपलब्ध

सरकार ने किसानों की फसल आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त खाद की मांग का भी विकल्प पोर्टल पर उपलब्ध कराया है। किसान अपनी फसल और भूमि की आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त उर्वरक के लिए अलग से आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए “अतिरिक्त खाद की मांग” विकल्प पर क्लिक करके टोकन बुक करना होगा।

प्रशासन का मानना है कि इससे वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही खाद का वितरण संभव होगा और किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या कृत्रिम कमी की स्थिति को रोका जा सकेगा।

CSC और सहकारी समितियों पर भी सुविधा

जिन किसानों को ऑनलाइन प्रक्रिया में कठिनाई होती है, उनके लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर भी ई-टोकन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा जिले के 16 डबल लॉक केंद्रों और 178 प्राथमिक कृषि साख सेवा सहकारी समितियों पर भी किसान सीधे संपर्क करके टोकन प्राप्त कर सकते हैं।

इस व्यवस्था से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के किसानों को भी समान रूप से लाभ मिलेगा और उन्हें किसी प्रकार की तकनीकी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

प्रशासन का सख्त संदेश

कलेक्टर ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस व्यवस्था का पालन प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली किसानों के हित में है और इसका उद्देश्य केवल सुगम, पारदर्शी और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करना है।

प्रशासन का मानना है कि ई-टोकन प्रणाली लागू होने से न केवल खाद वितरण में सुधार होगा बल्कि किसानों का समय भी बचेगा और भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी समाप्त होंगी।

सागर जिले में लागू की गई यह ई-टोकन प्रणाली कृषि व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों को न केवल सुविधा मिलेगी बल्कि खाद वितरण प्रणाली में एक नई कार्य संस्कृति भी विकसित होगी। प्रशासन की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में जिले में उर्वरक वितरण पूरी तरह सुव्यवस्थित और बिना किसी विवाद के संपन्न होगा।

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