भीषण गर्मी के बीच जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। इसी क्रम में कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने दैनिक पेयजल समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनता को पानी की समस्या किसी भी हालत में नहीं होनी चाहिए। बैठक में पेयजल से जुड़ी शिकायतों, नल-जल योजनाओं, हैंडपंप सुधार, टैंकर व्यवस्था और पाइपलाइन क्षति जैसे मुद्दों की विस्तार से समीक्षा की गई। साथ ही कार्यों में लापरवाही और विभागों के बीच समन्वय की कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में कलेक्टर ने कहा कि जन-शिकायतों का समाधान केवल कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें और नागरिकों की संतुष्टि के बाद ही शिकायतों का निराकरण मानें। उन्होंने आपचंद क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि तकनीकी समस्याओं को मौके पर पहुंचकर तत्काल ठीक किया जाए और शिकायतकर्ताओं को राहत मिले यह सुनिश्चित किया जाए।
सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत समस्या में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि किसी क्षेत्र में जल संकट की स्थिति बनती है तो तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

बंडा क्षेत्र के कुछ वार्डों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की जानकारी सामने आने पर नगरीय निकायों को तुरंत सक्रिय किया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जहां जरूरत हो वहां बिना देरी किए टैंकरों के माध्यम से नियमित जलापूर्ति कराई जाए ताकि लोगों को परेशानी न उठानी पड़े। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
देवरी और केसली क्षेत्र में हैंडपंपों की खराब स्थिति को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बंद पड़े हैंडपंपों की तत्काल मरम्मत कराई जाए और जिन क्षेत्रों में कुओं के माध्यम से जलापूर्ति हो रही है, वहां अनिवार्य रूप से पानी की गुणवत्ता जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि नागरिकों को केवल शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
जनपद पंचायत देवरी और केसली की ग्राम पंचायतों में पेयजल अधोसंरचना को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। तकनीकी दलों को सक्रिय कर छोटे-छोटे सुधार कार्यों को प्राथमिकता पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि मामूली तकनीकी खराबियों को समय रहते दूर कर बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।
बैठक में यह भी सामने आया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के निर्माण कार्यों के दौरान कई स्थानों पर पेयजल पाइपलाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे नल-जल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जल निगम और एनएचएआई की संयुक्त टीम को तत्काल मौके पर भेजकर पाइपलाइनों की मरम्मत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान आम जनता की मूलभूत सुविधाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

शाहगढ़ क्षेत्र में कार्यों के प्रति लापरवाही बरतने पर कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए डीई एमपीईबी शाहगढ़ का वेतन आगामी आदेश तक रोकने और कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। वहीं बंडा क्षेत्र में पीएचई के एसडीओ को लंबित शिकायतों का संतोषजनक निराकरण करने का अल्टीमेटम दिया गया। केसली और देवरी के एई पीएचई अधिकारियों को भी कार्यों में गति नहीं लाने पर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने सबसे पहले उन बंद पड़ी नल-जल योजनाओं को चिन्हित करने के निर्देश दिए जो मामूली सुधार कार्य, मोटर बदलने या बोरिंग मरम्मत से तुरंत चालू हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि छोटे हस्तक्षेपों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को राहत पहुंचाई जा सकती है, इसलिए ऐसे कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जाए।
वर्तमान में संचालित नल-जल योजनाओं की निगरानी के लिए क्लस्टर फील्ड टीम (CFT) को सक्रिय किया गया है। इस टीम में जनपद सीईओ, एई पीएचई, सरपंच और जीआरएस को शामिल किया गया है, जो ग्राम पंचायत स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग करेंगे। इन टीमों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि कहीं भी जल संकट की स्थिति बनने से पहले समाधान सुनिश्चित किया जाए।
कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन का पूरा फोकस इस बात पर है कि किसी भी तकनीकी खराबी या लापरवाही के कारण जनता को परेशानी न हो। उन्होंने दो टूक कहा कि जो अधिकारी अपने दायित्वों के निर्वहन में कोताही बरतेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है।
उन्होंने अधिकारियों से बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने और हर गांव तथा वार्ड तक नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। प्रशासन का उद्देश्य यह है कि गर्मी के इस कठिन समय में जिले का कोई भी नागरिक पेयजल संकट का सामना न करे।