सागर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड का सजीव प्रसारण रविवार को कृषि विज्ञान केंद्र सागर में उत्साह, जनसहभागिता और किसानों की सक्रिय उपस्थिति के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों, प्रगतिशील किसानों, महिला कृषकों और ग्रामीण युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर आधुनिक कृषि तकनीकों, मूल्य संवर्धन और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान मोर्चा सागर के अध्यक्ष श्री राजकुमार यादव ने की। मार्गदर्शन डॉ. के. एस. यादव, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख कृषि विज्ञान केंद्र सागर तथा कृषि विभाग के उप संचालक श्री राजेश त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में लगभग 110 प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष रूप से तथा 140 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की। इस प्रकार कुल 250 से अधिक लोगों की उल्लेखनीय भागीदारी दर्ज की गई।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अध्यक्ष राजकुमार यादव ने किसानों से किसान आईडी में सभी खसरों को जोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों और शासकीय योजनाओं का प्रभावी उपयोग कर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने किसानों को डिजिटल कृषि सेवाओं से जुड़ने और शासन की योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने की सलाह दी।

इस अवसर पर कृषि विशेषज्ञों ने खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आशीष त्रिपाठी ने मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और आगामी खरीफ फसलों की तैयारी पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खेती की शुरुआत मिट्टी की जांच से होती है और संतुलित पोषण प्रबंधन से उत्पादन लागत कम होने के साथ फसल उत्पादकता भी बढ़ती है।
वहीं डॉ. ममता सिंह ने सोयाबीन सहित अन्य खरीफ फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों, उन्नत किस्मों, बीजोपचार, संतुलित पोषण प्रबंधन तथा खरपतवार नियंत्रण के संबंध में किसानों को उपयोगी जानकारी दी। उन्होंने किसानों को मौसम आधारित कृषि प्रबंधन अपनाने और वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप खेती करने की सलाह दी।
कार्यक्रम में तकनीकी सहायक (खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) श्री मयंक मेहरा ने मूल्य संवर्धन, पोषण वाटिका, खाद्य प्रसंस्करण, महिला सशक्तिकरण तथा कृषि आधारित सूक्ष्म उद्यमों की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।
सहायक संचालक कृषि श्री अनिल राय ने किसान आईडी, ई-विकास प्रणाली तथा उर्वरक वितरण की ई-टोकन व्यवस्था के संबंध में किसानों को जानकारी दी। वहीं श्री एम.के. प्रजापति ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती के लाभों पर प्रकाश डालते हुए किसानों को रसायन मुक्त खेती की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती, कृषि विविधीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं की जानकारी भी साझा की। किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें टिकाऊ, लाभकारी और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
इसके पश्चात उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का सजीव प्रसारण देखा और सुना। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कृषि नवाचार, आत्मनिर्भर भारत, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जनभागीदारी और विकसित भारत के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। किसानों ने कार्यक्रम को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें नई तकनीकों को अपनाने और नवाचार आधारित खेती की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

कार्यक्रम में कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रगतिशील कृषकों की सक्रिय भागीदारी रही। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को कृषि विज्ञान केंद्र सागर की विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों का भ्रमण भी कराया गया। भ्रमण के दौरान मूल्य संवर्धन, पोषण सुरक्षा, कृषि आधारित उद्यमिता और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया तथा किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।
अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए वैज्ञानिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, पोषण उन्मुख खेती तथा मूल्य संवर्धन आधारित कृषि उद्यमों को अपनाने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, नवाचारों और शासकीय योजनाओं से जोड़ने की दिशा में अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।