बीना विकासखंड में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, शासकीय योजनाओं और टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित किसान रथ यात्रा का रविवार को ग्राम कजरई में भव्य किसान सम्मेलन के साथ समापन हुआ। 16 मई को ग्राम भानगढ़ से शुरू हुई यह यात्रा 16 दिनों तक विकासखंड की अधिकांश ग्राम पंचायतों तक पहुँची और हजारों किसानों को कृषि क्षेत्र की नवीन जानकारियों से जोड़ने का कार्य किया।
कृषि विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष अभियान का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती, जैविक कृषि, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देना था। यात्रा के दौरान अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने गांव-गांव पहुँचकर किसानों से संवाद किया तथा उन्हें खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के उपाय बताए।

किसानों को मिली डिजिटल सेवाओं की जानकारी
यात्रा के दौरान किसानों को विकास पोर्टल के माध्यम से घर बैठे उर्वरक प्राप्त करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। कृषि अधिकारियों ने बताया कि इस व्यवस्था के माध्यम से किसानों को खाद प्राप्त करने के लिए लंबी कतारों में खड़े रहने की आवश्यकता नहीं होगी। पोर्टल आधारित व्यवस्था से समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी तथा किसानों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।
अधिकारियों ने किसानों को डिजिटल तकनीकों का अधिकतम उपयोग करने और कृषि संबंधी सेवाओं को ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। किसानों ने भी इस पहल को उपयोगी बताते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया।

जैविक एवं प्राकृतिक खेती पर दिया गया विशेष जोर
किसान रथ यात्रा के दौरान जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। इसके विपरीत जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने से मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है तथा सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक खाद्यान्न उत्पादन संभव होता है।
किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और लागत कम कर अधिक लाभ प्राप्त करने के उपाय भी बताए गए। अधिकारियों ने कहा कि टिकाऊ खेती ही भविष्य की कृषि का आधार है और इससे किसानों की आय में भी वृद्धि संभव है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड की उपयोगिता समझाई
कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवधेश राय ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक किसान को समय-समय पर अपनी मिट्टी की जांच करानी चाहिए ताकि खेत में उपलब्ध पोषक तत्वों की वास्तविक स्थिति का पता चल सके।

उन्होंने बताया कि मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने से उत्पादन लागत कम होती है और फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादकता दोनों में सुधार होता है। किसानों से मृदा स्वास्थ्य कार्ड का नियमित उपयोग करने की अपील भी की गई।
नरवाई प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण पर जागरूकता
यात्रा के दौरान किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि खेतों में फसल अवशेष जलाने से मिट्टी के उपयोगी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं तथा पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है।
इसके स्थान पर नरवाई को खेत में मिलाकर जैविक खाद के रूप में उपयोग करने की सलाह दी गई। इससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है, जल धारण क्षमता में सुधार होता है और भूमि की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहती है।
बड़ी संख्या में किसानों ने लिया भाग
कजरई में आयोजित समापन कार्यक्रम में बीना, शेखपुर, मंडी बामोरा, गौहर तथा आसपास के अनेक गांवों से बड़ी संख्या में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, उन्नतशील किसानों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति रही।

इस अवसर पर कृषि विस्तार अधिकारी दीपेश मोघे, अजहर खान, सचिन चतुर्वेदी सहित क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न योजनाओं और कृषि तकनीकों की जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।
किसानों ने बताया उपयोगी अभियान
समापन अवसर पर किसानों ने किसान रथ यात्रा को कृषि जागरूकता का प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि इस प्रकार के अभियान किसानों को नई तकनीकों, शासकीय योजनाओं और आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसानों ने मांग की कि भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं।
कार्यक्रम का समापन किसानों को आत्मनिर्भर, जागरूक और पर्यावरण-अनुकूल खेती अपनाने का संदेश देते हुए किया गया। कृषि विभाग ने विश्वास व्यक्त किया कि इस यात्रा के माध्यम से प्राप्त जानकारी किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन सुधारने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगी।