भोपाल में गंदे पानी की सप्लाई से बढ़ी परेशानी: वार्ड-27 के 5 हजार लोग संकट में, टैंकरों से आ रहा मटमैला पानी !

Spread the love

भोपाल। राजधानी भोपाल में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट लोगों के लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है। शहर के वार्ड क्रमांक-27 में रहने वाले करीब 5 हजार नागरिक इन दिनों गंदे और मटमैले पानी की सप्लाई से परेशान हैं। स्थिति यह है कि नगर निगम के टैंकरों से पहुंचाया जा रहा पानी पीने योग्य नहीं है, जिससे लोगों को पीने के लिए अलग से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

स्थानीय रहवासियों का कहना है कि यह समस्या एक-दो दिन की नहीं बल्कि पिछले कई दिनों से लगातार बनी हुई है। बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

टैंकरों पर निर्भर है पूरी बस्ती

वार्ड-27 स्थित मांडवा बस्ती के रहवासियों के अनुसार इलाके में नियमित नल कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यहां अधिकांश परिवार नगर निगम द्वारा भेजे जाने वाले पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं।

स्थानीय निवासी शेर सिंह सोलंकी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से टैंकरों में आने वाला पानी अत्यधिक मटमैला और गंदा है। पानी में मिट्टी और अन्य अशुद्धियां साफ दिखाई देती हैं, जिसके कारण इसका उपयोग पीने के लिए नहीं किया जा सकता।

उन्होंने बताया कि मजबूरी में लोग आसपास के अन्य क्षेत्रों से पीने का पानी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं। कई परिवारों को पानी खरीदकर भी लाना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

गर्मी में बढ़ी मुश्किलें

गर्मी के मौसम में पानी की आवश्यकता सामान्य दिनों की तुलना में अधिक होती है। ऐसे समय में यदि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध न हो तो स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ जाते हैं।

रहवासियों का कहना है कि मटमैला पानी पीने से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों में संक्रमण, उल्टी-दस्त और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। यही कारण है कि अधिकांश परिवार इस पानी का उपयोग केवल अन्य घरेलू कार्यों में कर रहे हैं।

पार्षद और निगम से की शिकायत

स्थानीय लोगों ने क्षेत्रीय पार्षद और नगर निगम अधिकारियों से साफ एवं शुद्ध पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। रहवासियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उन्हें गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया है। अब वे प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

महापौर ने किया था फिल्टर प्लांट का निरीक्षण

उल्लेखनीय है कि हाल ही में भोपाल की महापौर मालती राय ने मध्यप्रदेश विधानसभा के सामने स्थित नगर निगम के फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया था।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा था कि जिन क्षेत्रों में बड़े तालाब से शुद्ध जल की आपूर्ति की जा रही है, वहां लोगों को आरओ लगाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि नगर निगम द्वारा गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।

हालांकि, जमीनी स्तर पर कई इलाकों से गंदे और मटमैले पानी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे जल आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अन्य क्षेत्रों से भी मिल रही शिकायतें

वार्ड-27 के अलावा शहर के कुछ अन्य क्षेत्रों से भी दूषित जल आपूर्ति की शिकायतें सामने आई हैं। भानपुर के समीप स्थित बिहारी बस्ती में भी नर्मदा परियोजना की पाइपलाइन से मटमैला पानी आने की शिकायत रहवासियों ने की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलापूर्ति लाइनों में लीकेज, पाइपलाइन में गंदगी का प्रवेश, टैंकरों की सफाई में लापरवाही अथवा वितरण प्रणाली की तकनीकी खामियां ऐसी समस्याओं का कारण बन सकती हैं।

स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार दूषित पानी के सेवन से हैजा, टाइफाइड, डायरिया, पीलिया और अन्य जलजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए प्रशासन को पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच कराना और प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना आवश्यक है।

गर्मी के इस मौसम में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता नागरिकों की मूल आवश्यकता है। ऐसे में वार्ड-27 सहित प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द समस्या का समाधान करना नगर निगम और प्रशासन की प्राथमिकता होना चाहिए, ताकि हजारों लोगों को राहत मिल सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *