बीना। बीना के एसडीएम कार्यालय सभागार में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान उस समय हड़कंप मच गया जब चार वर्षों से भूमि सीमांकन मामले में परेशान एक किसान ने आत्मदाह की धमकी दे दी। मामला बढ़ते ही प्रशासनिक अधिकारी तत्काल सक्रिय हो गए और मौके पर ही समस्या के समाधान की प्रक्रिया शुरू कर दी।
एसडीएम रवीश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित इस जनसुनवाई में विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। जनसुनवाई में कुल 31 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें भूमि विवाद, सीमांकन, आर्थिक सहायता, राशन पर्ची और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े मामले प्रमुख रहे।
चार साल से परेशान किसान ने खोया धैर्य
आगासौद निवासी सतीश तिवारी ने बताया कि उनकी पत्नी सपना तिवारी के नाम पर कृषि भूमि है, जिसका सीमांकन कराने के लिए वे पिछले चार वर्षों से तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने बताया कि चार बार निर्धारित शुल्क जमा करने और आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद अब तक सीमांकन नहीं हो पाया, जिससे परिवार लगातार परेशान है।

किसान ने आरोप लगाया कि हर बार जनसुनवाई में आश्वासन तो मिलता है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होती। इसी नाराजगी और निराशा के चलते वह आक्रोशित हो गए और आत्मदाह की चेतावनी तक दे दी।
प्रशासन ने तुरंत संभाला मोर्चा
स्थिति को गंभीर होते देख मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार हेमराज मेहर ने तत्काल हस्तक्षेप किया। उन्होंने पटवारी से फोन पर संपर्क कर सीमांकन प्रक्रिया को तुरंत आगे बढ़ाने के निर्देश दिए और समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद मामला शांत हुआ और प्रशासन ने राहत की सांस ली।
जनसुनवाई में 31 आवेदन, कई लंबित मुद्दे सामने आए
जनसुनवाई में कई अन्य गंभीर शिकायतें भी सामने आईं। खिरिया वार्ड निवासी पुरुषोत्तम टोंटे ने बताया कि सामुदायिक भवन के पास चबूतरा निर्माण के लिए 27 फरवरी 2024 को विधायक निधि से 2 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन भुगतान को लेकर उन्हें लगातार परेशान होना पड़ रहा है।
वहीं गांधी वार्ड निवासी सुनील अहिरवार ने बताया कि वह मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है, लेकिन पिछले छह माह से राशन पर्ची के लिए भटक रहा है। परिवार में तीन बेटियां हैं और खाद्यान्न सहायता न मिलने से स्थिति कठिन बनी हुई है।

इसके अलावा जनसुनवाई में सीमांकन, कब्जा दिलाने, पट्टा, आर्थिक सहायता, पीएम आवास योजना, गरीबी रेखा सूची में नाम जोड़ने सहित कुल 31 आवेदन प्रस्तुत किए गए।
अधिकारियों ने दिए त्वरित निराकरण के निर्देश
एसडीएम रवीश श्रीवास्तव ने सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर सभी आवेदनों के निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है, इसलिए किसी भी मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और लंबित मामलों की धीमी गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि मौके पर समाधान कर स्थिति को संभाल लिया गया, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि और राजस्व संबंधी समस्याओं के लंबे समय तक लंबित रहने से लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
फिलहाल प्रशासन ने सभी संबंधित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की बात कही है और मामले की मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई है।