छतरपुर में जर्जर मकानों पर प्रशासन सख्त, दो दिन में खाली करने का अल्टीमेटम—नहीं तो होगी कार्रवाई !

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छतरपुर (म.प्र.)। छतरपुर (मध्य प्रदेश)। जिले में जर्जर और असुरक्षित भवनों को लेकर प्रशासन ने अब बेहद सख्त रुख अपना लिया है। लगातार बढ़ते खतरे और आगामी बारिश के मौसम को देखते हुए तहसीलदार दुर्गेश तिवारी और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से ऐसे सभी भवनों में रह रहे लोगों को अंतिम चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संबंधित जर्जर भवनों को दो दिन के भीतर अनिवार्य रूप से खाली कर दिया जाए, अन्यथा इसके बाद बलपूर्वक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य संभावित जान-माल के नुकसान को रोकना है। अधिकारियों का कहना है कि कई पुराने मकान और भवन अत्यंत जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं, जिनकी दीवारों में दरारें आ चुकी हैं, छत कमजोर हो चुकी है और नींव भी अस्थिर दिखाई दे रही है। ऐसे हालात में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

तहसीलदार दुर्गेश तिवारी ने मौके पर पहुंचकर संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और वहां रह रहे परिवारों से सीधे संवाद किया। उन्होंने लोगों को समझाइश देते हुए कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक आदेश का नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा और जीवन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें और स्वयं अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था कर लें।

PWD विभाग के अधिकारियों ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बताया कि इन भवनों को पहले ही कई बार चिन्हित किया जा चुका है। विभाग की ओर से पूर्व में नोटिस भी जारी किए गए थे और कई बार मौखिक रूप से भी लोगों को सचेत किया गया था, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग अभी भी इन खतरनाक भवनों में रह रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है क्योंकि बारिश के मौसम में ऐसे भवनों के गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह अंतिम अवसर दिया जा रहा है। यदि निर्धारित दो दिनों की समय-सीमा के भीतर भवन खाली नहीं किए गए तो प्रशासनिक टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर बलपूर्वक भवनों को खाली कराएगी। इसके बाद इन सभी जर्जर संरचनाओं को गिराने की कार्रवाई भी की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि यह कदम किसी के खिलाफ नहीं बल्कि जनहित में उठाया जा रहा है। कई बार देखा गया है कि लोग पुरानी इमारतों में रहने की मजबूरी या अन्य कारणों से जोखिम उठाते रहते हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में जरा सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम दे सकती है। प्रशासन ने दोहराया कि मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी के तहत यह सख्त निर्णय लिया गया है।

स्थानीय स्तर पर प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे समय की आवश्यकता और सुरक्षा के लिहाज से सही कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग वैकल्पिक आवास की व्यवस्था को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों की सहायता के लिए भी उचित व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।

बारिश के मौसम को देखते हुए प्रशासन की चिंता और भी बढ़ गई है, क्योंकि इस समय दीवारों और छतों में नमी बढ़ने से कमजोर संरचनाएं और अधिक अस्थिर हो जाती हैं। इसी कारण प्रशासन ने पहले से ही सभी संबंधित भवनों की सूची तैयार कर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है।

अंत में प्रशासन ने एक बार फिर नागरिकों से अपील की है कि वे इस चेतावनी को गंभीरता से लें और समय रहते भवन खाली कर दें। किसी भी प्रकार की दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी संबंधित व्यक्तियों की होगी, क्योंकि प्रशासन ने समय रहते सभी आवश्यक चेतावनियां जारी कर दी हैं।

इस तरह छतरपुर प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब जर्जर भवनों के मामले में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी और जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सख्त से सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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