सागर में औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति: बीना रिफाइनरी विस्तार, नए औद्योगिक क्षेत्रों और आधारभूत सुविधाओं पर हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक !

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सागर, सागर जिले को औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। जिले में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने, आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने तथा भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीना रिफाइनरी) की विस्तार परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए बीना रिफाइनरी परिसर में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने की, जिसमें जिला प्रशासन, एमपीआईडीसी, बीना रिफाइनरी, राजस्व, जल संसाधन, विद्युत और उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में मुख्य रूप से बीना रिफाइनरी की भविष्य की आवश्यकताओं, नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, भूमि आवंटन, जल और विद्युत उपलब्धता तथा जिले में औद्योगिक निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने पर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने माना कि आने वाले वर्षों में सागर जिला औद्योगिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बन सकता है, जिसके लिए आधारभूत सुविधाओं का समय रहते विकास आवश्यक है।

बैठक के दौरान एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक श्री प्रतुल चंद्र सिन्हा ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि जिले के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र सिदगुवां और आईआईडी बीना वर्तमान में सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही सागर तहसील के मासवासी ग्रांट तथा खुरई तहसील के करमपुर में नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। इन क्षेत्रों के विकसित होने से जिले में बड़े निवेश आने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।

औद्योगिक क्षेत्रों के लिए जल उपलब्धता बनी प्राथमिकता

बैठक में नए औद्योगिक क्षेत्रों की जल आवश्यकताओं पर विशेष रूप से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित मासवासी ग्रांट औद्योगिक क्षेत्र के लिए भविष्य में लगभग 100 एमएलडी जल की आवश्यकता होगी। वहीं करमपुर और छेवला देवरी के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए तीन-तीन एमएलडी पानी की जरूरत अनुमानित है।

इस पर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने जल संसाधन विभाग और जल निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे तत्काल जल उपलब्धता का वैज्ञानिक आंकलन करें तथा इन क्षेत्रों के लिए जल आवंटन की संभावनाओं का परीक्षण करते हुए आवश्यक प्रस्ताव तैयार करें। उन्होंने कहा कि किसी भी औद्योगिक परियोजना की सफलता के लिए जल आपूर्ति सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत आवश्यकता है और इस विषय में कोई देरी नहीं होनी चाहिए।

बिजली आपूर्ति के लिए सब-स्टेशन स्थापना की तैयारी

औद्योगिक क्षेत्रों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बैठक में नए सब-स्टेशनों की स्थापना पर भी विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन क्षेत्रों में 232 केवीए और 132 केवीए क्षमता के विद्युत सब-स्टेशन स्थापित किए जाने की आवश्यकता होगी।

कलेक्टर ने विद्युत विभाग के संभागीय अभियंता को निर्देश दिए कि वे एमपीआईडीसी के तकनीकी अधिकारियों के साथ संयुक्त सर्वेक्षण कर आवश्यक तकनीकी रिपोर्ट और लागत अनुमान तैयार करें। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक स्वीकृतियों और अनुमतियों की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी की जाए ताकि औद्योगिक विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

भूमि हस्तांतरण के लंबित मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश

बैठक में मासवासी ग्रांट, करमपुर और छेवला देवरी से जुड़े भूमि आवंटन एवं हस्तांतरण के मामलों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि औद्योगिक विकास से जुड़े सभी लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण किया जाए।

उन्होंने कहा कि जहां कहीं भी कानूनी या प्रशासनिक अड़चनें हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए और भूमि हस्तांतरण एवं बेदखली की वैधानिक प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि निवेशकों को समय पर भूमि उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

केमिकल जोन और अतिरिक्त भूमि विकास पर जोर

भविष्य की औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एमपीआईडीसी ने जिले में एक विशेष केमिकल जोन विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा। इसके साथ ही छेवला देवरी क्षेत्र में अतिरिक्त 50 हेक्टेयर भूमि आवंटित करने का अनुरोध किया गया।

कलेक्टर ने संबंधित एसडीएम, तहसीलदार और एमपीआईडीसी अधिकारियों को संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण कर उपयुक्त भूमि चिन्हित करने तथा आवंटन प्रक्रिया को शीघ्र आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विस्तार के लिए पर्याप्त भूमि बैंक तैयार करना समय की आवश्यकता है।

बीना रिफाइनरी की विस्तार परियोजनाओं की समीक्षा

बैठक में भारत पेट्रोलियम की बीना रिफाइनरी से संबंधित विस्तार परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। इस दौरान आगासोद मार्ग तथा खिमलासा फाटक निर्माण से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने इन परियोजनाओं को स्थानीय यातायात और औद्योगिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

कलेक्टर ने रिफाइनरी प्रबंधन के साथ स्थानीय विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) गतिविधियों की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सीएसआर कार्यों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने के लिए जल्द जिला स्तरीय सीएसआर समिति की बैठक आयोजित की जाए।

रोजगारपरक प्रशिक्षण और शत-प्रतिशत प्लेसमेंट पर जोर

बैठक में कौशल विकास कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने प्रशिक्षित युवाओं के वास्तविक प्लेसमेंट की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने रिफाइनरी प्रबंधन को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएं जो सीधे रोजगार और स्वरोजगार से जुड़े हों।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाण पत्र देना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना होना चाहिए। इसलिए उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देकर अधिकतम युवाओं को रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जाएं।

सड़क और यातायात परियोजनाओं पर भी चर्चा

बैठक में क्षेत्र की कानून व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और सड़क अधोसंरचना से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मालथौन से मेलुआ चौराहा तक फोरलेन सड़क निर्माण की मांग पर कलेक्टर ने संबंधित विभागों को शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

इसके अलावा भारी वाहनों के बढ़ते दबाव को देखते हुए रेलवे ओवरब्रिज निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए रेलवे और लोक निर्माण विभाग को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री अनुराग सुजानिया, एसडीएम श्री रवि श्रीवास्तव, श्री अमन मिश्रा, महाप्रबंधक उद्योग विभाग श्रीमती मंदाकिनी पांडे, बीना रिफाइनरी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री के.के. दास सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में लिए गए निर्णयों को जिले के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से सागर जिला आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

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