सागर में नकली इंजन ऑयल का बड़ा खेल उजागर: पुलिस ने मारी रेड, 1.08 लाख का माल जब्त !

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सागर। सागर शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ब्रांडेड कंपनी के नाम पर कथित रूप से नकली इंजन ऑयल बेचने और उसका भंडारण करने वाले प्रतिष्ठान पर छापा मारकर लाखों रुपये का माल जब्त किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस और कंपनी के विशेषज्ञों ने पाया कि जब्त किए गए उत्पादों की पैकेजिंग प्रसिद्ध ब्रांड के उत्पादों से मिलती-जुलती थी, लेकिन उनमें कई ऐसी खामियां थीं जो उन्हें संदिग्ध बनाती हैं। मामले में कॉपीराइट अधिनियम और ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई एक प्रतिष्ठित लुब्रिकेंट कंपनी की शिकायत के आधार पर की गई। कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि एवं असिस्टेंट मैनेजर अजय कुमार पुंडीर ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि सिविल लाइन क्षेत्र स्थित ड्रिलटेक इंटरप्राइजेज नामक प्रतिष्ठान पर उनकी कंपनी के नाम और ब्रांड की नकल कर कथित रूप से नकली इंजन ऑयल का भंडारण और विक्रय किया जा रहा है।

शिकायत में यह भी कहा गया था कि इस प्रकार के नकली उत्पाद बाजार में बेचने से न केवल कंपनी की साख प्रभावित हो रही है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी आर्थिक नुकसान और तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की प्राथमिक जांच शुरू की और आवश्यक तथ्यों के सत्यापन के बाद छापेमार कार्रवाई की योजना बनाई।

बुधवार को सिविल लाइन थाना पुलिस ने कंपनी के प्रतिनिधियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ संयुक्त रूप से ड्रिलटेक इंटरप्राइजेज पर दबिश दी। जांच के दौरान प्रतिष्ठान में मौजूद उत्पादों का परीक्षण किया गया। मौके पर मौजूद निशांत तिवारी ने प्रतिष्ठान को अपने नाम से पंजीकृत बताया। इसके बाद कंपनी के विशेषज्ञों ने वहां रखे गए इंजन ऑयल के डिब्बों, पैकेजिंग और अन्य सामग्री की बारीकी से जांच की।

जांच में कई ऐसी अनियमितताएं सामने आईं जिन्होंने उत्पादों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े कर दिए। विशेषज्ञों के अनुसार उत्पादों पर अंकित वेबसाइट और ग्राहक सेवा नंबर कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे। इसके अतिरिक्त पैकेजिंग पर कई अंग्रेजी शब्दों की वर्तनी में भी त्रुटियां पाई गईं, जो आमतौर पर किसी प्रतिष्ठित कंपनी के मूल उत्पादों में नहीं होतीं।

हालांकि उत्पादों की बाहरी बनावट, रंग, डिजाइन और ब्रांडिंग मूल कंपनी के उत्पादों से काफी हद तक मिलती-जुलती थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी समानता के कारण सामान्य ग्राहक आसानी से भ्रमित हो सकता था और नकली उत्पाद को असली समझकर खरीद सकता था।

जांच टीम का कहना है कि इस प्रकार के उत्पाद केवल कंपनी के व्यापारिक हितों को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि वाहन मालिकों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। इंजन ऑयल किसी भी वाहन के इंजन की कार्यक्षमता और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि निम्न गुणवत्ता या नकली ऑयल का उपयोग किया जाए तो इंजन को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, जिससे वाहन मालिकों को भारी आर्थिक हानि उठानी पड़ सकती है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने छह भरे हुए ऑयल ड्रम और तीन खाली ड्रम बरामद किए। जब्त सामग्री का कुल अनुमानित मूल्य लगभग 1 लाख 8 हजार रुपये बताया गया है। पुलिस ने सभी सामग्री को जब्त कर अपने कब्जे में ले लिया है और परीक्षण के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जब्त किया गया संदिग्ध इंजन ऑयल कहां तैयार किया गया था और इसकी सप्लाई किन-किन क्षेत्रों में की जा रही थी। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि इस कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं तथा इसका नेटवर्क कितना बड़ा है।

सिविल लाइन थाना प्रभारी आनंद सिंह ने बताया कि कंपनी की शिकायत और विशेषज्ञों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कॉपीराइट अधिनियम और ट्रेडमार्क अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में नकली ब्रांडेड उत्पादों की बिक्री उपभोक्ताओं और कंपनियों दोनों के लिए चिंता का विषय है। ऐसे मामलों में ग्राहकों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। वाहन मालिकों को अधिकृत विक्रेताओं से ही उत्पाद खरीदने चाहिए और उत्पाद पर अंकित क्यूआर कोड, बैच नंबर, कंपनी की वेबसाइट तथा अन्य सुरक्षा संकेतकों की जांच करनी चाहिए।

सागर में हुई यह कार्रवाई नकली उत्पादों के खिलाफ चल रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। पुलिस का कहना है कि उपभोक्ताओं को धोखा देने वाले ऐसे मामलों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

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