सागर, 7 जून 2025 — कलेक्टर श्री संदीप जी आर के निर्देश पर सागर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद सागर विकासखंड द्वारा नागेश्वर मंदिर के सामने और सीआर मॉडल स्कूल के पास स्थित प्राचीन ऐतिहासिक बावड़ी के प्रांगण में बावड़ी उत्सव मनाया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रामबाग मठ के महंत श्री घनश्याम दास महाराज, मुख्य वक्ता श्री केके मिश्रा (जिला समन्वयक, जन अभियान परिषद), विशिष्ट अतिथि श्री डीएस यादव (संयुक्त संचालक, सामाजिक न्याय विभाग), डॉ. एमडी त्रिपाठी, श्री चंद्रप्रकाश शुक्ला, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य, और वरिष्ठ समाजसेवी श्रीमती रेखा राजपूत उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ महंत श्री घनश्याम दास महाराज ने बावड़ी का पूजन, अर्चन, मंत्रोच्चार और श्री हनुमान चालीसा के पाठ से किया। उन्होंने जन अभियान परिषद द्वारा आयोजित इस उत्सव को ऐतिहासिक जल धरोहरों के संरक्षण के लिए सराहनीय कदम बताया और ऐसे आयोजनों को जन सहभागिता से समय-समय पर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य वक्ता श्री डीएस यादव ने अपने उद्बोधन में जल स्त्रोतों के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बावड़ी उत्सव जैसे कार्यक्रमों से हम अपने प्राचीन जल स्त्रोतों के महत्व को समझ सकते हैं और उन्हें संरक्षित कर सकते हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहे।
विशिष्ट अतिथि श्री केके मिश्रा ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जन अभियान परिषद द्वारा किए जा रहे जल संरक्षण कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य प्राचीन जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करना और जल संकट से निपटना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आचार्य श्री महेशदत्त त्रिपाठी ने दुर्गा सप्तशती के पंचम अध्याय में प्रकृति को माँ भगवती दुर्गा का स्वरूप मानते हुए जल, वायु, अग्नि, आकाश और पृथ्वी के संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने नगर के विभिन्न प्राचीन बावड़ियों और तालाबों के ऐतिहासिक महत्व को बताते हुए उनके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम में जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई और महिला मंडल द्वारा भजन प्रस्तुत किए गए। सीएमसीएलडीपी के छात्रों ने रंगोली बनाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम का समापन संध्या के समय ऐतिहासिक बावड़ी के चारों ओर दीप जलाकर किया गया, जिससे वातावरण में एक अद्भुत दृश्य उत्पन्न हुआ।
इस आयोजन से यह संदेश गया कि प्राचीन जल स्त्रोतों का संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है और जन सहभागिता से ही हम अपने जल स्त्रोतों को संरक्षित कर सकते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता अर्पित सेन
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