सागर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शासकीय संभागीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) सागर में पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता को समर्पित एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षणार्थियों एवं आमजन में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना रहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगर निगम अध्यक्ष श्री वृंदावन अहिरवार उपस्थित रहे। उन्होंने संस्था परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया तथा विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत वृक्षारोपण अभियान से हुई, जिसमें मुख्य अतिथि सहित संस्था के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं प्रशिक्षणार्थियों ने पौधे लगाए। इस अवसर पर नगर निगम अध्यक्ष श्री वृंदावन अहिरवार ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं बल्कि मानव जीवन की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण पर्यावरणीय संतुलन लगातार प्रभावित हो रहा है। ऐसे समय में प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह प्रकृति के संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाए।
उन्होंने कहा कि वृक्ष हमारे जीवन का आधार हैं। वृक्ष हमें शुद्ध वायु, छाया, जल संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन प्रदान करते हैं। यदि हम आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य देना चाहते हैं तो अधिक से अधिक वृक्ष लगाना और उनका संरक्षण करना आवश्यक है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान संस्था के सभी प्रशिक्षणार्थियों को पर्यावरण सुरक्षा एवं स्वच्छता की शपथ दिलाई गई। शपथ के माध्यम से विद्यार्थियों ने जल संरक्षण, स्वच्छता बनाए रखने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा अधिकाधिक वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक नागरिक बनने और समाज में भी इस संदेश को प्रसारित करने का वचन दिया।

इसके पश्चात मुख्य अतिथि द्वारा संस्था परिसर का भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान उन्होंने विभिन्न ट्रेडों की कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कक्षों एवं प्रशिक्षण व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने संस्था में उपलब्ध संसाधनों और प्रशिक्षण गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि तकनीकी शिक्षा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ सामाजिक एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग रहने की सलाह दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था के प्राचार्य श्री अमरनाथ साकेत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे के पूरक हैं तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा समय-समय पर वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण कार्यक्रम एवं पर्यावरण जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रशिक्षणार्थियों में सामाजिक चेतना विकसित करना तथा उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
प्राचार्य वर्ग-दो सुश्री पूजा तिवारी ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए पर्यावरण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं या अभियानों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल आदतों को अपनाना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से प्लास्टिक का कम उपयोग करने, जल एवं बिजली की बचत करने तथा स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।
कार्यक्रम में एमपी 33 बटालियन से आए सुबेदार श्री रवि कुमार की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने युवाओं को अनुशासन, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के महत्व से अवगत कराया तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर संस्था के प्रशिक्षण अधीक्षक श्री लखन अहिरवार, श्री सुनील सेन, प्रशिक्षण अधिकारी श्री दीपक बोहरे, श्री विजय यादव, श्री मिलिंद पाठक, श्रीमती पुष्पलता प्रजापति, श्री प्रशांत कोष्टी, श्री पुष्पेंद्र दक्ष, श्रीमती भारती उपाध्याय तथा एनसीसी अधिकारी श्री प्रदीप उपाध्याय सहित संस्था के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थियों ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण के सामूहिक संदेश और वृक्षों की सुरक्षा के संकल्प के साथ हुआ। संस्था परिवार ने यह संकल्प लिया कि भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जनजागरूकता से संबंधित गतिविधियों का नियमित आयोजन किया जाएगा, ताकि समाज में पर्यावरण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।