घटनाक्रम का विस्तार:
शनिवार की दोपहर शिवाजी वार्ड निवासी अंशुल यादव अपने दोस्तों – बाबू, जितेंद्र, कल्याण और राहुल के साथ दलपतपुर हनुमान मंदिर के पास पार्टी करने गया था। पार्टी के बाद सभी दोस्त पास ही बह रही बीना नदी में नहाने के लिए नीचे उतरे।
चूंकि दोस्तों में से कई को तैरना नहीं आता था, वे किनारे पर ही नहाने लगे। अंशुल तैरना जानता था, इसलिए वह नदी के बीचोंबीच चला गया। थोड़ी देर में ही वह गहरे पानी में समा गया और नजरों से ओझल हो गया।
सूचना मिलने के बाद की कार्रवाई:
जब काफी देर तक अंशुल पानी से बाहर नहीं आया, तो उसके साथ मौजूद दोस्तों ने इसकी जानकारी तत्काल घरवालों को दी। परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी गई।
स्थानीय लोग भी युवक की तलाश में जुट गए, लेकिन जब कोई सफलता नहीं मिली, तो सागर से SDRF (State Disaster Response Force) की टीम को बुलाया गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए SDM मनोज चौरसिया, थाना प्रभारी शशि विश्वकर्मा, नगरपालिका स्वास्थ्य अधिकारी शैलेंद्र सिंह लोधी सहित बड़ी संख्या में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।

स्थानीय जन प्रतिक्रिया और सुरक्षा संबंधी चिंताएं:
इस घटना से स्थानीय लोगों में शोक और चिंता का माहौल है। दलपतपुर क्षेत्र में बीना नदी का यह हिस्सा गहरा और खतरनाक माना जाता है, विशेषकर मानसून के समय।
स्थानीय नागरिकों और प्रशासन द्वारा यह मांग उठाई जा रही है कि:
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नदी के किनारे चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।
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युवाओं को गहरे पानी में न जाने की हिदायत दी जाए।
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नहाने के सुरक्षित स्थान निर्धारित किए जाएं।
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ऐसे संवेदनशील स्थानों पर स्थायी सुरक्षा निगरानी या चेतावनी तंत्र बनाया जाए।
यह दुखद घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि प्राकृतिक जलस्रोतों के पास लापरवाही कितना बड़ा खतरा बन सकती है। SDRF और प्रशासन की तत्परता से शव बरामद हो सका, लेकिन एक युवा की जान नहीं बच सकी। इस घटना से सबक लेते हुए जनमानस में नदी, तालाब जैसे स्थानों के प्रति सावधानी और सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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