इंदौर निगम के अफसर के घर-दफ्तर पर छापा:ईओडब्ल्यू एसपी बोले- आय 15 लाख, खर्च 1.85 करोड़ किए !

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प्रारंभिक कार्रवाई का विवरण:

मंगलवार सुबह इंदौर नगर निगम के उद्यान विभाग में पदस्थ सहायक अधीक्षक चेतन पाटिल के निवास और कार्यालय पर EOW ने एक साथ छापामार कार्रवाई की। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के गंभीर आरोपों के आधार पर की गई।

EOW एसपी आर.एस. यादव ने पुष्टि की है कि चेतन पाटिल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में उनके पास कुल अनुमानित ₹1.85 करोड़ की संपत्ति उजागर हुई है, जबकि 20 वर्षों की नौकरी में उनकी वैध आय लगभग ₹15 लाख पाई गई।


अब तक बरामद संपत्ति का विवरण:

EOW द्वारा की गई अब तक की तलाशी में निम्नलिखित संपत्ति सामने आई है:

संपत्ति का प्रकार अनुमानित मूल्य
गुलमोहर कॉलोनी में दो प्लॉट ₹28.60 लाख
दो मंजिला मकान ₹42 लाख
बीमा पॉलिसियां ₹25 लाख
सोना (वज़न व मूल्यांकन जारी) अनुमानित ₹20 लाख
नकद राशि ₹1 लाख

टिप्पणी: जांच अधिकारियों ने बताया कि अभी कई दस्तावेज़ों की स्क्रूटनी और मूल्यांकन शेष है, जिससे पूरी संपत्ति का आंकलन और भी अधिक हो सकता है।


नौकरी और आय के स्रोत पर संदेह:

चेतन पाटिल की सरकारी सेवा की शुरुआत मस्टरकर्मी (अस्थायी कर्मचारी) के रूप में हुई थी। EOW के मुताबिक, इतने सीमित वेतन के बावजूद उन्होंने:

  • इंदौर और इंदौर से बाहर प्रॉपर्टी अर्जित की

  • परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर संपत्ति बनाई

  • बीमा निवेश, सोना और नकद जमा किया

EOW सूत्रों का मानना है कि यह आय सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से अर्जित प्रतीत हो रही है।


घोटाले की जांच:

पाटिल पर उद्यान विभाग के कार्यों में ₹4 करोड़ के पौधों की खरीदी घोटाले का भी आरोप है। शिकायत के अनुसार:

  • टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं

  • बिलों में हेराफेरी

  • पौधों की वास्तविक संख्या व मूल्य में गड़बड़ी

  • फर्जी कंपनियों के माध्यम से भुगतान

EOW की एक टीम निगम कार्यालय में मौजूद दस्तावेज़ों — जैसे टेंडर कॉपी, सप्लाई रजिस्टर, भुगतान फाइल, बिल व वाउचर — की बारीकी से जांच कर रही है


दस्तावेजों की छानबीन और तकनीकी विश्लेषण:

पाटिल के गुलमोहर कॉलोनी स्थित निवास में टीम ने:

  • बैंक पासबुक, प्रॉपर्टी रजिस्ट्री, FD, म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस, जमीन के दस्तावेज जब्त किए हैं।

  • पाटिल और परिजनों के पैन कार्ड व आयकर विवरण की भी जांच की जा रही है।

  • डिजिटल डाटा, पेन ड्राइव, लैपटॉप आदि की भी फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।

    ह मामला उजागर करता है कि कैसे एक मामूली वेतनभोगी अधिकारी भ्रष्टाचार के जरिए करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर सकता है। चेतन पाटिल की यह कार्रवाई न केवल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि विभागीय घोटाले किस तरह जन धन की बर्बादी का कारण बनते हैं।

    EOW की जांच अगर पूरी पारदर्शिता और गहराई से की जाती है, तो यह इंदौर नगर निगम के भीतर व्यापक सुधार और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

 

 

ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
7806077338, 9109619237

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