मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण घोषणा की, जो राज्य की महिलाओं के लिए एक राहत और सशक्तिकरण का संदेश लेकर आई। इंदौर कलेक्टोरेट से बड़वानी के ग्राम तलून में आयोजित कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने ‘लाड़ली बहना योजना’ के तहत बड़ी घोषणा की।

1. लाड़ली बहना योजना में नई राहत:
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि दिवाली से पहले प्रदेश की 1 करोड़ 27 लाख लाड़ली बहनों को प्रतिमाह ₹1500 की राशि दी जाएगी।
यह योजना पहले ₹1000 प्रतिमाह से शुरू हुई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर ₹1250 किया गया। अब इसे और बढ़ाते हुए 2028 तक ₹3000 प्रतिमाह तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।
मुख्यमंत्री का संकल्प:
“हमने डंके की चोट पर कहा है कि बहनों को 3 हजार रुपए प्रतिमाह देंगे और हम इस संकल्प पर कायम हैं।”
2. रक्षाबंधन पर विशेष शगुन:
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी बताया कि अगले महीने रक्षाबंधन पर्व पर लाड़ली बहनों को अतिरिक्त ₹250 की राशि शगुन स्वरूप ट्रांसफर की जाएगी। इसका उद्देश्य त्योहार के अवसर पर महिलाओं को आर्थिक सहयोग देना है।

3. विपक्ष पर तीखा प्रहार:
अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला।
मुख्यमंत्री के कथन:
“अय्याशी कांग्रेस करती है और यह उनका रिकॉर्ड है कि सभी नेता जमानत पर चल रहे हैं। बीजेपी की सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है और उसके हितों में कार्य कर रही है।”
4. कानून व्यवस्था पर सख्त रुख:
इंदौर के कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी उर्फ डकैत पर लगे आरोपों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य में कानून का राज कायम है और जो भी व्यक्ति कानून तोड़ेगा, चाहे वह कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री का बयान:
“हमने प्रशासन से कह दिया है कि जो जहां मिले, उसे पकड़ो। चाहे वह डकैत हो या डकैत का बाप। कानून का शासन हर हाल में रहेगा।”
5. सामाजिक स्वास्थ्य पर भी फोकस:
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर जागरूकता फैलाना था। मुख्यमंत्री ने सिकल सेल रोग से निपटने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुँचाने की बात कही।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह घोषणाएं न केवल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम हैं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जनता के बीच भरोसे को मजबूत करने का भी प्रयास हैं। रक्षाबंधन जैसे सामाजिक पर्वों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना एक राजनीतिक संदेश भी है, जो संवेदनशीलता और जनसंपर्क को दर्शाता है।
इस भाषण में जहां एक ओर सामाजिक योजनाओं की झलक दिखी, वहीं दूसरी ओर विपक्ष पर सख्त राजनीतिक बयान भी शामिल रहे, जिससे आगामी समय में राजनीतिक माहौल गरमाने की पूरी संभावना है।