दमोह में आदिवासी-दलित परिवारों से जबरन जमीन खाली कराने की कोशिश !

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 पीड़ितों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर न्याय की लगाई गुहार

दमोह जिले के इमलिया चौकी क्षेत्र के जंगल में बसे लगभग 40 आदिवासी और दलित परिवारों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यह परिवार पिछले करीब 30 वर्षों से सरकारी पट्टे की जमीन पर निवास कर रहे हैं। 1995 में इन्हें राज्य सरकार द्वारा कानूनी रूप से जमीन आवंटित की गई थी ताकि वे वहां निवास कर खेती-बाड़ी कर सकें। लेकिन अब कुछ प्रभावशाली दबंग इन परिवारों को वहां से जबरन बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं।

बुधवार को पीड़ित परिवारों के दर्जनों सदस्य कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि दबंग लगातार धमकियां दे रहे हैं और कई बार उनकी कृषि भूमि पर ट्रैक्टर चलाकर फसल भी नष्ट कर दी गई है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे कलेक्टर श्री सुधीर कोचर से मिलकर अपनी व्यथा बताना चाहते थे, लेकिन कार्यालयीन कारणों से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। हालांकि, डिप्टी कलेक्टर बृजेश चौरसिया ने ग्रामीणों की शिकायत सुनी और आवेदन प्राप्त कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार को नाजायज तरीके से नहीं हटाया जाएगा और दोषियों के खिलाफ नियम अनुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे।

पीड़ितों ने मांग की है कि उन्हें कानूनी संरक्षण दिया जाए और उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे लोगों पर तुरंत कार्रवाई की जाए, ताकि वे शांतिपूर्वक जीवन यापन कर सकें। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन पीड़ितों की कितनी जल्द सुनवाई करता है और दबंगों के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं।

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