देश में लागू हुए आपातकाल की 50वीं बरसी पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा इसे “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाया गया। सागर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने 1975 से 1977 तक चले आपातकाल के काले अध्याय को याद करते हुए कांग्रेस की नीतियों की तीखी आलोचना की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकतंत्र सेनानी संघ अध्यक्ष एडवोकेट कृष्णवीर सिंह ने की। उन्होंने आपातकाल के दौरान झेली गई यातनाओं को साझा करते हुए कहा कि “यह ऐसा समय था जब न बोलने की आज़ादी थी, न सोचने की। संविधान को ताक पर रख दिया गया था और हजारों लोग बिना किसी अपराध के जेलों में ठूंस दिए गए थे।”

राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने मुख्य वक्ता के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि “कांग्रेस ने राष्ट्रवादी विचारधारा को कुचलने और सत्ता बचाने के लिए आपातकाल लागू किया। उस दौरान 1.40 लाख से अधिक लोगों को जेलों में बंद किया गया और 22 कस्टोडियल डेथ हुईं। यह लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने वाला समय था। मीसा कानून में संशोधन कर प्राकृतिक न्याय की भावना को भी रौंदा गया।”
उन्होंने कहा कि “आज मोदी सरकार बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान की आत्मा को जीवित रखने का कार्य कर रही है, जबकि कांग्रेस ने उस आत्मा को बार-बार कुचलने का कार्य किया।”

पूर्व मंत्री एवं खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने आपातकाल को भारत की दूसरी आज़ादी की लड़ाई बताते हुए कहा कि “इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोकतंत्र की हत्या की और देश को जेलखाने में तब्दील कर दिया। प्रेस, न्यायपालिका और जनता की आवाज को कुचल दिया गया। यहां तक कि वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को अपनी मां के अंतिम दर्शन तक की अनुमति नहीं दी गई।”
उन्होंने कहा कि “आज कांग्रेस संविधान की पुस्तक दिखाती है, लेकिन उन्हीं के शासन में संविधान में 42 संशोधन कर नागरिक अधिकार, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और प्रेस की आवाज को समाप्त कर दिया गया था।”

विधायक शैलेंद्र कुमार जैन ने कहा कि “आपातकाल लागू करते समय इंदिरा गांधी ने मंत्रिमंडल की सहमति भी नहीं ली, बल्कि सीधे राष्ट्रपति से हस्ताक्षर करवा कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की हत्या की। पत्रकारिता को बंधक बनाकर संविधान के चौथे स्तंभ को कमजोर किया गया।”
जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत ने संजय गांधी द्वारा चलाए गए जबरन नसबंदी अभियान को याद करते हुए कहा कि “हजारों युवाओं की जबरन नसबंदी की गई। भय इतना था कि लोग गांव छोड़ जंगलों में छिप गए थे।”
माननीय मंचासीन अतिथि और वक्ता:
- राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल
- पूर्व गृह मंत्री एवं विधायक भूपेन्द्र सिंह
- विधायक शैलेंद्र जैन
- जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत
- भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी
- नगर निगम अध्यक्ष वृंदावन अहिरवार
- प्रदेश मंत्री प्रभु दयाल पटेल
- पूर्व विधायक सुधा जैन
- प्रदेश संयोजक अनुराग प्यासी
- विभिन्न मोर्चों के अध्यक्षगण
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ नेता रामकुमार साहू ने किया। विषय प्रस्तावना डॉ. वीरेंद्र पाठक द्वारा प्रस्तुत की गई और स्वागत भाषण भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी ने दिया।
सम्मानित हुए लोकतंत्र सेनानी और परिजन:
गुरभेज सिंह, परसराम श्यामनानी, सुर्पिया नवाथे, रोहित सोनी, कुसुम बाई, अंजली, शबाना राही, दिवाकर वर्मा, रामदीन यादव, दानिश राही, काजू अनिल जैन, दीपक एवं सुमित भंडारी, रामसेवक शांडिल्य, अनिल यादव, नितिन यादव, अरुण पलनीतकर सहित कई लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों को मंच से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

संदेश और संकल्प:
कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे काले दिन फिर कभी न लौटें, इसके लिए जनता को जागरूक रहना होगा।
“अमृतकाल में प्रवेश कर रहे भारत को और मजबूत लोकतंत्र की आवश्यकता है, और इसके लिए हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता, लोकतंत्र सेनानी, युवा, वरिष्ठ नागरिक और आमजन मौजूद रहे।
यह आयोजन न केवल लोकतंत्र के लिए किए गए संघर्षों की याद दिलाने वाला रहा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को लोकतंत्र की अहमियत समझाने और संविधान की रक्षा के लिए संकल्प लेने का अवसर भी बना।