नेपियर घास की खेती पर सागर में महिला गौशाला संचालकों को मिला प्रशिक्षण !

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सागर, मध्य प्रदेश | राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सागर इकाई द्वारा मनरेगा अंतर्गत दलपतपुर में संचालित गौशाला में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और पशुपालन को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मंगलवार को नेपियर घास की खेती (Napier Grass Cultivation) विषय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जिले की सभी महिला गौशाला संचालकों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का उद्देश्य पशु आहार की गुणवत्तापूर्ण और सुलभ आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ महिलाओं को आधुनिक खेती तकनीकों से अवगत कराना था। प्रशिक्षण में विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने भाग लिया और महिलाओं को खेती व पशुपालन से जुड़ी अहम जानकारियाँ दीं।

प्रशिक्षण में शामिल हुए विशेषज्ञ

इस प्रशिक्षण शिविर में पशुपालन विभाग से जिला संवर्धन बोर्ड के नोडल अधिकारी श्री बलराम ठाकुर, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से जिला प्रबंधक श्री अनूप तिवारी, पशु चिकित्सक डॉ. रुद्रप्रयाग चंदेल, सहायक पशु चिकित्सक श्री रिजवान, किसान उत्पादक कंपनी से श्री अब्दुल कमल, और खेती टीम के प्रतिनिधियों ने महिलाओं को विषयवार तकनीकी जानकारी दी।

श्री बलराम ठाकुर ने पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं और उनके लाभ के बारे में विस्तार से बताया, जिससे महिलाएं आगे चलकर शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकें।

नेपियर घास की खेती पर विस्तृत जानकारी

डॉ. रुद्रप्रयाग चंदेल ने नेपियर घास की खेती से संबंधित तकनीकी पक्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नेपियर घास एक पोषक आहार है, जो दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है। यह तेजी से बढ़ने वाला चारा है और एक बार लगाने के बाद कई वर्षों तक उपज देता है। इसकी कटिंग समय-समय पर करके इसे पशु आहार के रूप में प्रयोग में लाया जा सकता है।

महिलाओं को यह भी बताया गया कि इसकी खेती के लिए मिट्टी की तैयारी, सिंचाई, कटिंग और रखरखाव के क्या-क्या उपाय करने चाहिए, जिससे अधिकतम उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

सब्जी उत्पादन और तकनीकी प्रशिक्षण भी शामिल

किसान उत्पादक कंपनी से श्री अब्दुल कमल ने महिलाओं को सब्जी उत्पादन की आधुनिक विधियों के बारे में बताया। उन्होंने कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली सब्जियों की खेती, जैविक खाद का उपयोग, कीट नियंत्रण के उपाय और बाजार में बिक्री की रणनीतियों पर प्रशिक्षण दिया। वहीं, खेती टीम ने सब्जियों की बेबी प्लांट तैयार करने की तकनीकी पर विशेष जानकारी दी, जिससे महिलाएं अपने घर या गौशाला परिसर में पौधशाला विकसित कर सकती हैं।

सरपंच ने किया ग्रास कटिंग का वितरण

प्रशिक्षण सत्र के अंत में ग्राम पंचायत दलपतपुर की सरपंच श्रीमती जय लोधी के हाथों नेपियर घास की ग्रास कटिंग (कलम) का वितरण किया गया। यह कलमें अब गौशाला भूमि पर लगाई जाएंगी, और कुछ महीनों के भीतर घास तैयार होकर पशुओं को पोषक चारा के रूप में उपलब्ध कराई जा सकेगी।

ग्रामीण महिलाओं ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अब उन्हें बाहर से चारा मंगवाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे उन्हें आर्थिक रूप से भी लाभ होगा और पशुओं को पौष्टिक आहार मिल सकेगा।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी प्रयास

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत जिले में विभिन्न महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से गौशालाएं संचालित की जा रही हैं। अब इन महिलाओं को नेपियर घास जैसी चारे की खेती का प्रशिक्षण देकर स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की ओर एक सकारात्मक पहल की गई है।

जिला प्रबंधक श्री अनूप तिवारी ने कहा कि आने वाले समय में समूहों को और भी कृषि, पशुपालन, विपणन एवं उद्यमिता से जुड़े प्रशिक्षण दिए जाएंगे, ताकि ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें और स्थायी आजीविका के साधनों से जुड़ सकें।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एक ओर जहां पशुपालकों को उच्च गुणवत्ता वाला पशु चारा उपलब्ध कराने की दिशा में सहायक सिद्ध होगा, वहीं दूसरी ओर यह ग्रामीण महिलाओं के लिए एक नई राह खोलेगा। सागर जिले में संचालित गौशालाओं की महिलाएं अब आधुनिक तकनीकी के सहारे चारा उत्पादन से लेकर सब्जी खेती तक में अपनी अहम भूमिका निभा सकेंगी, जो न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी होगा, बल्कि महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण भी बनेगा।

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