जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सागर कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने एक महत्वपूर्ण और सख्त कार्यवाही करते हुए दिल्ली पब्लिक स्कूल, नरसिंहपुर रोड मकरोनिया के नाम पर पंजीकृत एक स्कूल बस का फिटनेस प्रमाण पत्र निरस्त करने के निर्देश दिए। यह कार्यवाही तब की गई जब उक्त बस, क्रमांक एमपी 15 पीए 0485, स्कूली बच्चों को लेकर जाते समय 06 अगस्त को दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

प्रशासन की इस त्वरित कार्यवाही ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बच्चों की जान के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा, और ऐसे मामलों में कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
🚌 घटना का विवरण
06 अगस्त 2025 की सुबह, दिल्ली पब्लिक स्कूल की स्कूल बस शहरी क्षेत्र में बच्चों को स्कूल ले जा रही थी। इसी दौरान बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि कोई गंभीर जनहानि नहीं हुई, लेकिन बस की स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट था कि वह वाहन असुरक्षित अवस्था में संचालित हो रहा था।

घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने स्थिति का संज्ञान लिया और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) को तत्काल प्रभाव से उक्त बस के फिटनेस प्रमाण पत्र को निरस्त करने के निर्देश दिए।
📑 प्रशासन की तत्परता
कलेक्टर के निर्देश पर RTO कार्यालय ने बिना देरी के जांच कर कार्यवाही शुरू की। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि बस को गंभीर क्षति पहुंची थी, और उसका बिना मरम्मत के सड़क पर चलाया जाना बच्चों की जान को जोखिम में डाल सकता था। इसी के आधार पर मोटरयान अधिनियम 1988 के तहत यह निर्णय लिया गया कि बस का फिटनेस प्रमाण पत्र तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि,
“जिस स्कूल वाहन की फिटनेस गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी हो और वह मरम्मत के बिना संचालन योग्य न हो, उसका सड़क पर चलना कानून के खिलाफ है। इसलिए कलेक्टर महोदय के निर्देश पर नियमानुसार कार्यवाही की गई है।”
⚖️ मोटरयान अधिनियम 1988 का पालन
मोटरयान अधिनियम, 1988 के अंतर्गत यह प्रावधान है कि किसी भी सार्वजनिक या निजी वाहन को तब तक सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जब तक वह फिटनेस मापदंडों पर खरा न उतरे।
स्कूल वाहनों के संदर्भ में यह नियम और भी सख्ती से लागू किया जाता है क्योंकि ये वाहन छोटे बच्चों की दैनिक आवाजाही से जुड़े होते हैं। ऐसी स्थिति में यदि कोई स्कूल बस दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है, तो उसका फिटनेस सर्टिफिकेट स्वाभाविक रूप से संदेह के घेरे में आता है, और उसकी वैधता को तुरंत जांचना प्रशासन की प्राथमिकता बन जाती है।
👨👩👧👦 अभिभावकों में जागरूकता और प्रशासन पर भरोसा
इस कार्यवाही के बाद जिले के अभिभावकों में राहत की भावना देखी गई। कई अभिभावकों ने प्रशासन के इस त्वरित निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की कार्यवाहियाँ स्कूल प्रबंधन पर भी जवाबदेही तय करती हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि बच्चों को किसी भी प्रकार के जानलेवा जोखिम में न डाला जाए।
श्रीमती कंचन पटेल, एक छात्र की मां, ने कहा –
“हम रोज डरते हैं कि हमारे बच्चे जिस बस में जाते हैं, वह सुरक्षित है भी या नहीं। प्रशासन की यह सख्ती सही दिशा में एक बड़ा कदम है।”
🏫 स्कूल बसों की नियमित जांच की योजना
इस घटना के बाद कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने संकेत दिए हैं कि जिले में संचालित सभी निजी और शासकीय स्कूलों के वाहनों की फिटनेस की विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। आरटीओ विभाग, यातायात पुलिस और जिला शिक्षा विभाग को निर्देश दिए जा सकते हैं कि वे:
- स्कूल बसों की सुरक्षा जांच करें
- ड्राइवरों के लाइसेंस और पृष्ठभूमि की जांच करें
- बसों में सीसीटीवी, फर्स्ट एड किट, फायर एग्जिट और सीट बेल्ट की उपलब्धता सुनिश्चित करें
- ओवरलोडिंग और नियम उल्लंघन पर जुर्माना और निलंबन की कार्यवाही करें
सागर जिले में हुई इस त्वरित प्रशासनिक कार्यवाही से यह स्पष्ट संकेत गया है कि कलेक्टर स्तर पर संवेदनशीलता और तत्परता के साथ बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्कूल प्रबंधन, वाहन संचालक और अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की सुरक्षा के इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर जागरूक और सतर्क रहें। प्रशासन की यह कार्रवाई एक नजीर है, जिससे अन्य स्कूल प्रबंधन को भी अपने वाहन संचालन में सुधार की प्रेरणा लेनी चाहिए।
जिला प्रशासन की यह सख्ती, न सिर्फ बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व भी सुनिश्चित करेगी।