रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय सागर और जी.एस. कॉलेज जबलपुर के बीच ऐतिहासिक अनुबंध

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रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय, सागर और जबलपुर स्थित जी.एस. कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स के बीच एक ऐतिहासिक शैक्षणिक अनुबंध (एम.ओ.यू.) संपन्न हुआ है। यह अनुबंध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनोद कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित समारोह के दौरान हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर शिक्षा, शोध और अकादमिक सहयोग को नई दिशा देने की आवश्यकता पर बल दिया गया, विशेषकर गांधीवादी विचारधारा पर केंद्रित अनुसंधान के क्षेत्र में।

समझौते की मुख्य बातें

इस एम.ओ.यू. के अंतर्गत दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग, संयुक्त शोध परियोजनाएं, विद्यार्थियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम, शोध कार्यों का आदान-प्रदान, शैक्षणिक संसाधनों की साझेदारी, शोध पत्र प्रकाशन, कार्यशालाएं और संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, विद्यार्थी विनिमय कार्यक्रम की भी संभावना बनेगी, जिससे छात्रों को विविध अनुभव प्राप्त होंगे।

कुलपति प्रो. मिश्रा का संबोधन

समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. विनोद कुमार मिश्रा ने जी.एस. कॉलेज के ऐतिहासिक महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि “यह कॉलेज गांधीवादी विचारधारा को केंद्र में रखकर निरंतर शोध कार्यों को आगे बढ़ा रहा है। इस अनुबंध से दोनों संस्थानों को शोध और नवाचार के क्षेत्र में नई दिशा मिलेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में यह एम.ओ.यू. समयानुकूल और दूरदर्शी कदम है। शोध और अकादमिक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव हैं। इस अनुबंध को तभी सार्थक किया जा सकता है जब हम इसके उद्देश्यों और लक्ष्यों पर गंभीरता से अमल करें।”

कुलसचिव प्रो. शक्ति जैन का वक्तव्य

विश्वविद्यालय की कुलसचिव प्रो. शक्ति जैन ने अनुबंध की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि, “शिक्षा और शोध कार्यों के क्षेत्र में ऐसे शैक्षणिक अनुबंधों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इससे दोनों संस्थानों के बीच अकादमिक समन्वय सुदृढ़ होता है और ज्ञान का व्यापक विस्तार होता है।”

शोधपीठ का योगदान – डॉ. शरद रजक का संबोधन

जी.एस. कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. शरद रजक ने बताया कि “स्वर्गीय श्री यशवंत शंकर धर्माधिकारी शोधपीठ द्वारा गांधीवादी विचारधारा पर केंद्रित अनुसंधान कार्यों को निरंतर प्रोत्साहित किया जाता है। इस शोधपीठ से जुड़े शोधार्थियों को फेलोशिप भी प्रदान की जाती है, जिससे वे अपने शोध कार्यों को बिना किसी आर्थिक बाधा के पूर्ण कर सकें। यह फेलोशिप गांधीवादी चिंतन और सामाजिक नवाचार को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है।”

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस महत्वपूर्ण अवसर पर शैक्षणिक जगत के अनेक प्रतिष्ठित व्यक्ति उपस्थित रहे। इनमें प्रो. रजनी दुबे, सुभाषिनी जैन, डॉ. पंचम लाल सनोडिया, राकेश चढ़ार, डॉ. स्वर्णलता तिवारी, डॉ. भावना पटेल, डॉ. मुकेश अहिरवार, डॉ. पवन खटीक, डॉ. चंदन सिंह, डॉ. दिनेश अहिरवार, डॉ. ब्रजेश रिछारिया, डॉ. उदित मलैया, डॉ. सिद्धि त्रिपाठी, डॉ. सिम्मी मोदी, डॉ. प्रिया सिंह, शुभांशु शुक्ला, श्री आकाश कोरी, श्री आर्यन सिंह राजपूत एवं श्री शीतल सोनी प्रमुख रूप से शामिल थे।

संचालन एवं आभार प्रदर्शन

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. मिथिलेश शरण चौबे द्वारा किया गया जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. अल्का पुष्प निशा ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों एवं सहयोगी संस्थानों के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए इस समझौते को शैक्षणिक विकास का एक सशक्त माध्यम बताया।

यह अनुबंध न केवल सागर विश्वविद्यालय और जी.एस. कॉलेज, जबलपुर के लिए बल्कि सम्पूर्ण राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक पहल है। गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित शोध को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला यह समझौता निश्चित ही छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए एक नया द्वार खोलेगा। इसके माध्यम से न केवल अकादमिक गुणवत्ता में सुधार आएगा, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले विचारों को भी मजबूती मिलेगी।

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