चार वाहन जब्त, फिटनेस प्रमाण पत्र रद्द, ड्रायवर का लाइसेंस निलंबित !

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स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन और परिवहन विभाग ने मंगलवार को शहर में अवैध और असुरक्षित स्कूली वाहनों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी मनोज कुमार तेहनगुरिया के नेतृत्व में की गई विशेष चैकिंग अभियान के दौरान 24 स्कूली वाहनों की जांच की गई। इनमें से 4 मारुति वैन एलपीजी गैस किट से संचालित पाई गईं, जिन्हें तत्काल जप्त कर लिया गया और कार्यालय परिसर में सुरक्षार्थ रखा गया।

जप्त की गई मारुति वैनों के रजिस्ट्रेशन क्रमांक MP15BA1273, MP15BA2758, MP15BA2945 और MP20CC0274 हैं। इन सभी में गैरकानूनी रूप से एलपीजी गैस किट लगी थी। चूंकि एलपीजी अत्यंत ज्वलनशील गैस है, इसलिए माननीय न्यायालय के आदेशानुसार स्कूली बच्चों के परिवहन हेतु एलपीजी गैस किट से संचालित वाहनों का प्रयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है। इन वाहनों की गैस किट तुरंत निकालकर कार्यालय में सुरक्षित रख ली गई।

चैकिंग के दौरान अन्य चार वाहन प्रायवेट श्रेणी में पंजीकृत पाए गए, जो नियमों के विरुद्ध स्कूल वाहन के रूप में उपयोग किए जा रहे थे। इन वाहनों में निर्धारित संख्या से अधिक बच्चों को बैठाया गया था। उक्त उल्लंघनों के अंतर्गत मोटरयान अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत चालानी कार्रवाई करते हुए प्रत्येक वाहन पर ₹15,000 का जुर्माना लगाया गया।

दुर्घटनाग्रस्त स्कूल बस की फिटनेस रद्द, ड्रायवर का लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई

इसी दिन, शहर में एक स्कूल बस क्रमांक MP15CH0485 स्कूली बच्चों को स्कूल ले जाते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गई। तत्काल प्रभाव से वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 56(4) के तहत रद्द कर दिया गया। साथ ही, यह निर्देश दिया गया है कि जब तक वाहन का मरम्मत कर यांत्रिक रूप से उपयुक्त प्रमाणित नहीं किया जाता, तब तक उसका रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र और परमिट निलंबित रहेगा।

घटना की जांच में पाया गया कि बस के ब्रेक्स सही स्थिति में थे, जिससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि दुर्घटना वाहन चालक की लापरवाही के कारण हुई। इस आधार पर वाहन चालक को नोटिस जारी करते हुए, मोटरयान अधिनियम की धारा 19(क) के अंतर्गत उसका ड्रायविंग लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।

शिक्षा विभाग को निर्देश, स्कूलों में सख्त पालन अनिवार्य

परिवहन विभाग द्वारा इस कार्रवाई की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को भी दी गई है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि वे जिले के समस्त शैक्षणिक संस्थानों को माननीय उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों और परिवहन आयुक्त, मध्यप्रदेश ग्वालियर के पत्र क्रमांक 3020/नीति/स्कूल/टीसी/2019 दिनांक 24.06.2019 के अनुसार स्कूल बसों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने हेतु अनिवार्य निर्देश जारी करें।

अभिभावकों से अपील: बच्चों को अनफिट या गैस से संचालित वाहनों में न भेजें स्कूल

परिवहन विभाग ने जिले के समस्त अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को ऐसे स्कूली वाहनों में न भेजें, जो एलपीजी गैस किट से संचालित हैं या अनफिट स्थिति में हैं। यह बच्चों की जान को खतरे में डालने जैसा है और न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन के बराबर है।

स्कूल बस संचालकों को सख्त चेतावनी

क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने समस्त स्कूल बस संचालकों को चेतावनी दी है कि वे स्कूली बसों का संचालन माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुसार करें। प्रत्येक बस में निम्नलिखित अनिवार्य व्यवस्थाएं होनी चाहिए:

  • स्पीड गवर्नर
  • फिटनेस प्रमाण पत्र
  • बीमा दस्तावेज
  • प्रदूषण प्रमाण पत्र
  • मोटरयान कर भुगतान
  • फर्स्ट एड बॉक्स
  • अग्निशमन यंत्र
  • चालक के पास वैध हेवी ड्रायविंग लाइसेंस
  • चालक और परिचालक निर्धारित गणवेश में हों
  • विद्यार्थियों की संख्या निर्धारित बैठने की क्षमता के अनुरूप हो

यदि आगे भी किसी स्कूल बस में इन मानकों की अनदेखी पाई जाती है, तो संबंधित वाहन के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिसमें वाहन की जब्ती, भारी जुर्माना और ड्रायवर का लाइसेंस निलंबन शामिल हो सकता है।

निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी

क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह जांच और कार्रवाई केवल एक बार की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह नियमित रूप से जारी रहेगी। बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। परिवहन विभाग स्कूली बच्चों के परिवहन को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।



इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि जिला प्रशासन और परिवहन विभाग स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क और गंभीर हैं। अभिभावकों, स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों से अपेक्षा की जाती है कि वे नियमों का पूर्ण पालन करें, जिससे किसी भी प्रकार की दुर्घटना या अनहोनी को टाला जा सके।

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