नगर निगम और UNAccc के बीच एमओयू, सतत आवास मिशन को मिलेगी नई दिशा

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नगर निगम और यूनाइटेड नेशन एक्शन फॉर क्लाइमेट चेंज काउंसिल (UNAccc) के बीच गुरुवार को एक महत्वपूर्ण एमओयू (समझौता ज्ञापन) साइन होने जा रहा है। इस अवसर पर जाल सभा गृह में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के LIFE (Lifestyle for Environment) मिशन, स्वच्छ भारत सर्टिफिकेशन तथा सस्टेनेबल हाउसिंग मिशन नेट-जीरो के अनुरूप पहल को आगे बढ़ाना है।

गरीब और निम्न आय वर्ग के लिए सस्टेनेबल हाउसिंग प्रोग्राम

इस एमओयू के तहत नगर निगम और UNAccc संयुक्त रूप से एक सस्टेनेबल हाउसिंग प्रोग्राम लागू करेंगे। यह योजना विशेष रूप से बीपीएल और निम्न आय वर्ग के परिवारों को लाभान्वित करेगी। परियोजना का फोकस परिवारों के एलपीजी, बिजली और वाहन ईंधन खर्च को कम करने पर होगा। अनुमान है कि इस योजना से एक परिवार की औसत खर्च में 30 प्रतिशत तक की बचत सुनिश्चित की जा सकेगी।

महापौर पुष्य मित्र भार्गव ने जानकारी दी कि प्रारंभिक चरण में यह परियोजना छह महीने के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की जाएगी। यदि परिणाम संतोषजनक रहते हैं तो इसका विस्तार अन्य क्षेत्रों में भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि योजना का लक्ष्य लोगों को पर्यावरण अनुकूल, आत्मनिर्भर और किफायती आवास उपलब्ध कराना है।

हरित तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा का होगा उपयोग

नगर निगम और UNAccc का यह संयुक्त प्रयास स्वच्छ ऊर्जा, हरित तकनीक और सतत विकास के मानकों को अपनाने पर केंद्रित रहेगा। इसका उद्देश्य न केवल प्रदूषण को कम करना है बल्कि आम जनता की जेब पर पड़ने वाले बोझ को भी घटाना है। इस परियोजना के तहत नेट-जीरो अवधारणा को प्राथमिकता दी जाएगी।

डॉ. श्रीकांत के. पाणिग्राही होंगे मुख्य अतिथि

कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. श्रीकांत के. पाणिग्राही शामिल होंगे, जो जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञ हैं। डॉ. पाणिग्राही ने भारत सरकार और संयुक्त राष्ट्र के कई अहम पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। वे इस समय प्रधानमंत्री कार्यालय में जलवायु परिवर्तन सलाहकार, नीति आयोग की कार्ययोजना समिति के सदस्य सचिव तथा पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के सदस्य हैं।

इसके अलावा वे UNAccc के सह-अध्यक्ष, IISD (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सस्टेनेबल डेवलपमेंट) के महानिदेशक तथा कार्बन माइनस इंडिया (CMI) के निदेशक भी हैं। उनके मार्गदर्शन में इस पहल को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

शहर को मिलेगा लाभ

नगर निगम का मानना है कि इस एमओयू के जरिए न केवल पर्यावरण संरक्षण को गति मिलेगी, बल्कि शहरवासियों की आर्थिक बचत और जीवन-स्तर में सुधार भी होगा। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता आगे चलकर शहर को देशभर में सस्टेनेबल मॉडल के रूप में स्थापित कर सकती है।


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