बालाघाट नेटवर्क संकट : ग्रामीणों का हाइवे पर चक्काजाम, प्रशासन से ठोस समाधान की मांग !

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बालाघाट ज़िले के परसवाड़ा जनपद क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की गंभीर समस्या ने शुक्रवार को उग्र रूप ले लिया। परेशान ग्रामीणों ने बालाघाट–बैहर राजमार्ग पर चक्काजाम कर दिया। मोहनपुर, चालीसबोड़ी, कसंगी और कावेली सहित कई गांवों के लोगों का आरोप है कि उनके इलाके में बीएसएनएल का टावर तो लगा हुआ है, लेकिन नेटवर्क बिल्कुल नहीं मिलता। स्थिति यह है कि ग्रामीणों को नेटवर्क सुविधा प्राप्त करने के लिए 20 किलोमीटर दूर बालाघाट या उकवा तक जाना पड़ता है।

📌 ग्रामीणों का दर्द : 20 किलोमीटर पैदल सफर

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार आपात स्थिति में मरीज को एंबुलेंस बुलाने तक में दिक़्क़त होती है। कॉल करने के लिए उन्हें जंगलों और पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए दूर दराज तक जाना पड़ता है। यह समस्या नई नहीं है। 30 मई को जनसमस्या निवारण शिविर और 5 अगस्त को जनसुनवाई में भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

📌 स्वास्थ्य सेवाएं और सरकारी योजनाएं प्रभावित

परसवाड़ा जनपद पंचायत सदस्य रमेश पंद्रे ने बताया कि नेटवर्क की समस्या से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। मरीजों को समय पर अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, केवाईसी अपडेट, पेंशन आवेदन, संबल योजना और मनरेगा जैसे काम भी रुक गए हैं। मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी और मस्टर रोल से संबंधित कार्य ठप पड़े हैं, जिससे श्रमिकों की रोज़गार गारंटी प्रभावित हो रही है।

📌 18 से अधिक गांव पूरी तरह कटे

नक्सल प्रभावित बैहर और परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के जंगल इलाकों में बसे 18 से अधिक गांव इस नेटवर्क समस्या से जूझ रहे हैं। गांगुलपारा के बंजारी गांव में जब ग्रामीणों ने राजमार्ग पर चक्काजाम किया तो मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह से रुक गया। इससे यातायात व्यवस्था चरमराकर रह गई।

📌 आंदोलन जारी, समाधान की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि वे तब तक आंदोलन जारी रखेंगे जब तक प्रशासन नेटवर्क सुविधा उपलब्ध नहीं कराता। उनका आरोप है कि सरकार और प्रशासन सिर्फ कागजों पर विकास दिखा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लोग संचार जैसी बुनियादी सुविधा से भी वंचित हैं।

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