उज्जैन।
शनिवार 23 अगस्त की रात उज्जैन का माहौल धार्मिक उत्साह और आस्था से सराबोर हो गया। कारण था शनिचरी अमावस्या का पर्व, जिसे पूरे देशभर में विशेष मान्यता प्राप्त है। इस पावन अवसर पर उज्जैन के शिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। आधी रात से ही लोग स्नान और पूजा-पाठ के लिए पहुंचने लगे।

श्रद्धालुओं का जनसैलाब
त्रिवेणी घाट पर सूरज निकलने से पहले ही हजारों श्रद्धालु जमा हो गए। आस्था का यह माहौल इतना प्रबल रहा कि जगह-जगह लोग सिर्फ एक झलक पाने और डुबकी लगाने को आतुर दिखे। प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्था की थी। घाट पर स्नान की सुविधा नहीं मिलने पर फव्वारों के जरिए स्नान की वैकल्पिक व्यवस्था की गई, ताकि कोई भी श्रद्धालु आस्था की डुबकी से वंचित न रहे।
शनि मंदिर में विशेष श्रृंगार
उज्जैन के प्रसिद्ध नवग्रह शनि मंदिर को इस अवसर पर फूलों से सजाया गया। शनि महाराज का राजसी श्रृंगार किया गया, जिसमें उन्हें राजा के रूप में पगड़ी पहनाई गई। इस आकर्षक श्रृंगार और पूजन-अर्चन के दौरान श्रद्धालु “जय शनिदेव” के जयकारों के साथ मंदिर परिसर में दर्शन के लिए उमड़ पड़े।

पनौती छोड़ने की परंपरा
शनिचरी अमावस्या का एक अनोखा पहलू यह भी रहा कि श्रद्धालु स्नान और दर्शन के बाद अपने जूते-चप्पल और कपड़े घाट पर छोड़ देते हैं। मान्यता है कि इन्हें छोड़ने से व्यक्ति के जीवन से पनौती और अशुभता दूर होती है। इस बार भी घाट पर दानस्वरूप छोड़े गए वस्त्रों और चप्पलों का बड़ा ढेर लग गया। प्रशासन ने इन वस्तुओं को सुरक्षित कर लिया है और बताया कि इनकी नीलामी की जाएगी, जिससे प्राप्त राशि धार्मिक व सामाजिक कार्यों में खर्च होगी।
तर्पण और श्राद्ध का महत्व
शनिचरी अमावस्या केवल स्नान और दान का ही पर्व नहीं है, बल्कि इसे पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितरों की आत्मा को तर्पण करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और परिवार पर शांति का आशीर्वाद बना रहता है।

ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जब अमावस्या शनिवार को पड़ती है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन शनि देव की पूजा से साढ़े साती, पितृ दोष, कालसर्प योग, अशुभ ग्रहों और अन्य कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। पंडित जितेंद्र बैरागी का कहना है कि जो लोग श्रद्धा भाव से स्नान-दान और शनिदेव की पूजा करते हैं, उन्हें जीवन में विशेष शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

प्रशासन की तैयारियां
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए। घाटों पर पुलिस बल, स्वास्थ्य सुविधाएं और पानी की आपूर्ति की व्यवस्था की गई। प्रशासन का कहना है कि भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर इस बार विशेष सावधानी बरती गई है।