हिमाचल फीमेल हेल्थ वर्कर ने जान जोखिम में डाली,VIDEO:

Spread the love


हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की चौहारघाटी से इंसानियत और कर्तव्यपरायणता की मिसाल पेश करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक महिला हेल्थ वर्कर ने अपनी जान की परवाह न करते हुए न केवल उफनते नाले को पार किया बल्कि 2 महीने के मासूम को जीवन रक्षक टीका भी लगाया। इस साहसी महिला का नाम कमला है, जो पीएचसी सुधार में तैनात हैं।

पुल बहा, रास्ता टूटा – लेकिन नहीं टूटी जज़्बे की डोर

दरअसल, हाल ही में क्षेत्र में बादल फटने से कई जगहों पर पुल और रास्ते बह गए। सुधार गांव जाने वाला एक छोटा पुल भी बाढ़ की भेंट चढ़ गया। इसी दौरान कमला को अपने क्षेत्र में 2 माह के बच्चे का टीकाकरण करने जाना था। रास्ता टूटा देख उनके सामने दो विकल्प थे – या तो लौट जाएं, या फिर जोखिम उठाकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं। कमला ने दूसरा रास्ता चुना।

छलांग का वीडियो बना सोशल मीडिया पर हिट

स्थानीय युवाओं ने इस घटना का वीडियो बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कमला ने पीठ पर वैक्सीन का डिब्बा टांगा हुआ है और उफनते नाले पर करीब 6 फुट लंबी छलांग लगाकर उसे पार कर रही हैं। पल भर की चूक उन्हें मौत के मुंह में धकेल सकती थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत दिखाई और दूसरी तरफ पहुंचकर बच्चे का सफलतापूर्वक टीकाकरण किया।

विभाग ने कहा – “जोखिम नहीं लें, लेकिन साहस काबिले तारीफ”

जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डॉ. गुप्ता ने कमला के साहस की सराहना करते हुए कहा कि विभाग ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था कि वे जोखिम उठाएं। उनका कहना है – “हम कभी भी कर्मचारियों को ऐसे खतरे मोल लेने की सलाह नहीं देते। लेकिन कमला ने जो किया वह साहसिक और कर्तव्यनिष्ठा का परिचायक है। यदि विभाग स्तर पर कोई सिफारिश हुई तो उनका नाम पुरस्कार के लिए भेजा जाएगा।”

कमला – हमेशा से समर्पित

कमला पहले भी दुर्गम इलाकों में सेवा दे चुकी हैं। बताया जाता है कि करीब 4 साल पहले उनका तबादला सुधार पीएचसी में हुआ था। उससे पहले वे चंबा जिले के दुर्गम क्षेत्र किलाड़ में अपनी सेवाएं दे रही थीं। वहां भी उन्होंने कई बार कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी निभाई। स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि कमला कभी भी अपने काम से पीछे नहीं हटतीं।

ग्रामीणों में चर्चा का विषय बनी ‘कमला दीदी’

सुधार गांव और आसपास के क्षेत्रों में लोग अब कमला को ‘कमला दीदी’ कहकर पुकार रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में जब कई लोग अपनी जिम्मेदारी से बचते हैं, वहीं कमला ने अपनी जान दांव पर लगाकर मासूम की जिंदगी सुरक्षित बनाई।

प्रशासन के लिए बड़ा सबक

यह घटना सिर्फ एक महिला हेल्थ वर्कर के साहस की कहानी नहीं, बल्कि सिस्टम के लिए भी एक बड़ा संदेश है। यदि गांव-गांव तक सुरक्षित रास्ते और पुल बने होते, तो शायद किसी को अपनी जान जोखिम में डालकर जिम्मेदारी नहीं निभानी पड़ती।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *