
मध्यप्रांत कृषि यंत्र निर्माता संघ ने पूर्व गृहमंत्री एवं वरिष्ठ विधायक का किया सम्मान
खुरई। पूर्व गृहमंत्री एवं वरिष्ठ विधायक भूपेन्द्र सिंह ने मध्यप्रदेश के कृषि यंत्र निर्माताओं से आग्रह किया है कि वे खुरई में उद्योग स्थापित करें। उन्होंने कहा कि खुरई में उद्योग लगाने के लिए आवश्यक अधोसंरचना, कनेक्टिविटी, शांति और संसाधन उपलब्ध हैं। “खुरई को शांति का टापू कहा जा सकता है और यहां उद्योग स्थापना के लिए आदर्श स्थिति मौजूद है। उद्योगपतियों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी,” उन्होंने भरोसा दिलाया।
यह बातें उन्होंने मध्यप्रांत कृषि यंत्र निर्माता संघ की वार्षिक आम सभा में कहीं। इस अवसर पर संघ ने श्री भूपेन्द्र सिंह का सम्मान भी किया।

खुरई – कृषि यंत्र निर्माण का उभरता हब
श्री सिंह ने कहा कि खुरई में इस समय लगभग 75 छोटे-बड़े कृषि यंत्र निर्माण कारखाने संचालित हैं। खुरई न केवल प्रदेश बल्कि देश का एक महत्वपूर्ण एग्रीकल्चर इक्विपमेंट हब बन चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में खुरई की पहचान पूरे देश में और मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि खुरई-बीना क्षेत्र की भूमि बेहद उपजाऊ है और सिंचाई परियोजनाओं से इस क्षेत्र को नई ऊर्जा मिली है।
- बीना नदी परियोजना, उल्दन बांध और हनोता परियोजना से करीब 70 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
- केन-बेतवा परियोजना से बुंदेलखंड के 10 जिलों को लाभ होगा, जिससे यहां कृषि उत्पादन और औद्योगिक मांग दोनों बढ़ेंगी।
उन्होंने कहा कि “आने वाले तीन साल में खुरई में कम से कम 200 उद्योग स्थापित होंगे।”

कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास की आधारशिला
पूर्व गृहमंत्री ने कहा कि खुरई का भौगोलिक और औद्योगिक महत्व तेजी से बढ़ रहा है।
- खुरई चारों तरफ से सागर, बीना और राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा हुआ है।
- खिमलासा-राहतगढ़ मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से अनुरोध किया गया है।
- खुरई और आसपास के क्षेत्रों में कई ओवरब्रिज बन चुके हैं और बाकी जल्द ही पूरे होंगे।
- बीना में 50 हजार करोड़ की रिफाइनरी स्थापित हो चुकी है और दूसरी रिफाइनरी पर काम चल रहा है। इसका सीधा लाभ खुरई को मिलेगा।
उन्होंने बताया कि खुरई में प्रदेश का पहला लैंड बैंक बनाया गया है। यहां छोटे कारखानों के लिए 35 प्लॉट पहले से तैयार हैं और बड़े क्षेत्र को इंडस्ट्रियल एरिया के रूप में विकसित करने की योजना है।
सुविधाएं और संभावनाएं
- खुरई रेलवे स्टेशन पर डम्पिंग रैक सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रेल मंत्री को भेजा गया है, जिससे स्थानीय मंडी में आवक बढ़ेगी।
- राज्य सरकार की एक जिला एक उत्पाद योजना में खुरई के कृषि यंत्र निर्माण को शामिल किया गया है।
- बीना-खुरई-सागर को इंडस्ट्रियल कॉरिडोर घोषित किया गया है। सड़क किनारे की जमीनें औद्योगिक उपयोग के लिए आरक्षित हैं।
- खुरई में 24 घंटे बिजली आपूर्ति होती है। बीना नदी परियोजना से बिजली उत्पादन भी होगा।
- कच्चे लोहे का डिपो स्थापित करने की योजना है ताकि छोटे उद्योगों को कच्चा माल आसानी से मिल सके और कृषि यंत्रों की लागत घटे।
पूर्व गृहमंत्री ने कहा कि “उद्योग स्थापना के लिए अधोसंरचना जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी है कानून व्यवस्था। खुरई इस दृष्टि से ‘शांति का टापू’ है।”
खुरई का भविष्य – आत्मनिर्भर भारत की राह में
श्री सिंह ने कहा कि खुरई का एक नाम और ब्रांड बन चुका है। आने वाले वर्षों में खुरई मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश का एग्रीकल्चर हब होगा।
उन्होंने कहा, “भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। रक्षा सहित कई क्षेत्रों में हमने आत्मनिर्भरता हासिल की है। अब कृषि क्षेत्र में भी हमें विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना होगा। स्वदेशी उत्पाद को अपनाने वाला देश ही आर्थिक रूप से मजबूत होता है।”
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य
कार्यक्रम में मध्यप्रांत कृषि यंत्र निर्माता संघ के पदाधिकारी
- ओ. पी. चौकसे (अध्यक्ष)
- चन्द्रप्रताप सिंह (अध्यक्ष)
- विजय जैन
- बाबू भाई
- हरीश लालवानी
- विकास समैया
सहित प्रदेशभर से आए संघ के सदस्य और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
भूपेन्द्र सिंह ने कृषि यंत्र निर्माताओं से खुरई में उद्योग लगाने का आह्वान करते हुए कहा कि यहां उद्योग स्थापना के लिए सभी सुविधाएं, शांति और अधोसंरचना उपलब्ध हैं। आने वाले वर्षों में खुरई कृषि यंत्र उद्योग का राष्ट्रीय केंद्र बनकर उभरेगा।