सागर, 24 अगस्त 2025
भोपाल हाट में इस सप्ताह आयोजित आजीविका फ्रेश मेला ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि स्व-सहायता समूह (SHGs) से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं अब आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास के नए आयाम गढ़ रही हैं। इस मेले की विशेषता यह रही कि इसमें प्रदर्शित सभी उत्पाद पूरी तरह से रसायन रहित, जैविक और प्राकृतिक खेती से तैयार किए गए थे।

सागर जिले की महिलाओं की दमदार भागीदारी
सागर जिले के देवरी और केसली विकासखंडों की महिलाओं ने इस मेले में खास उपस्थिति दर्ज कराई। अपने गांवों की मेहनत और लगन से उगाई गई हरी सब्जियां, फल, जैविक दवाइयां और दूध से बने उत्पादों को लेकर वे भोपाल पहुंचीं।
- पहले ही दिन 95% सब्जियों का काउंटर खाली हो गया।
- खरीदारों ने सागर से भेजे गए टमाटर, मिर्च के पौधे, मेंहर की हरी सब्जियां और भाजी को हाथों-हाथ खरीद लिया।
- वहीं, सागर का देवश्री घी भी खासा लोकप्रिय रहा और अब तक ₹5000 से अधिक राशि में इसकी बिक्री हो चुकी है।

महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा
मेले में शामिल श्रीमती रश्मि शुक्ला, श्रीमती अनीता पटेल, श्रीमती रिचा लोधी समेत करीब 6 महिलाएं बिक्री काउंटर संभाल रही हैं। महिलाओं का कहना है कि –
“पहली बार हमें इतने बड़े मेले में अपने उत्पाद बेचने का अनुभव हुआ। शुरुआत में थोड़ी झिझक थी, लेकिन खरीदारों की बढ़ती संख्या और अच्छे दाम मिलने से हमारा आत्मविश्वास दोगुना हो गया है। अब हम भविष्य में और बड़े मेलों में सामूहिक रूप से हिस्सा लेने और अपने उत्पाद को ब्रांड के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखती हैं।”

जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग
आजीविका मिशन और स्व-सहायता समूहों के जरिए ग्रामीण महिलाएं अब न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं बल्कि उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने का काम भी कर रही हैं।
भोपाल हाट में लगी भीड़ ने यह संकेत दिया कि शहरी उपभोक्ता अब जैविक और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
जिला प्रशासन का दृष्टिकोण
जिला प्रशासन और आजीविका मिशन के अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के मेले महिलाओं को बाजार से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। इससे एक ओर जहां ग्रामीण उत्पादकों को उचित दाम मिलता है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को ताज़ा, स्वास्थ्यवर्धक और रसायन मुक्त उत्पाद प्राप्त होते हैं।

आगे की राह
मेले में शामिल महिलाओं ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए सीखने और आगे बढ़ने का बड़ा मौका साबित हुआ। आने वाले समय में वे जिले की अन्य महिलाओं को भी साथ लेकर बड़े स्तर पर भागीदारी करेंगी।
निष्कर्ष
आजीविका फ्रेश मेला केवल एक प्रदर्शनी या बिक्री मंच नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत कदम है। सागर की महिलाओं की यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि यदि अवसर और मंच मिलें तो ग्रामीण महिलाएं अपने परिश्रम और उत्पादों से पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में भी पहचान बना सकती हैं।