सागर से दो महत्वपूर्ण पहल: महिलाओं के कौशल विकास हेतु प्रशिक्षण;

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सागर, 24 अगस्त 2025।
जिले में आज दो विशेष पहलें सुर्खियों में रहीं—एक ओर ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गौशाला से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु तीसरे बैच का प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में “माटी गणेश–सिद्ध गणेश” अभियान के अंतर्गत कार्यशाला की तैयारियां पूरी हो गई हैं।


गौशाला महिलाओं का तीसरा बैच प्रशिक्षण प्रारंभ

मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सागर इकाई के मार्गदर्शन में केसली और रहली विकासखंड की महिलाओं को साकेत धाम गौशाला में गोबर और गोमूत्र से बनने वाले उत्पादों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

  • प्रशिक्षण में महिलाओं को फेस क्रीम, दंत मंजन, साबुन, हैंडवॉश, आई ड्रॉप आदि बनाने की विधि सिखाई जा रही है।
  • आज के सत्र में प्रतिभागी महिलाओं को विशेष रूप से दंत मंजन और साबुन बनाने का कौशल प्रदान किया गया।

कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. के मार्गदर्शन में यह प्रयास किया जा रहा है कि प्रत्येक गौशाला से जुड़ी अथवा जरूरतमंद महिला उत्पाद निर्माण के जरिए अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर सके।
इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा।

प्रशिक्षण में महिलाओं को यह भी सिखाया जा रहा है कि—

  • गुणवत्ता को कैसे बनाए रखें,
  • अपने बने उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग कैसे करें,
  • और बाजार में किस तरह उनकी मार्केटिंग और बिक्री सुनिश्चित हो सके।

‘माटी गणेश–सिद्ध गणेश’ अभियान : कल से कार्यशाला

दूसरी ओर, पर्यावरण संरक्षण और परंपरा को साथ लेकर चलने वाली एक अनूठी पहल “माटी गणेश–सिद्ध गणेश अभियान” कल से आरंभ हो रही है।

यह अभियान मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद और नर्मदा समग्र के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जा रहा है।
इसके अंतर्गत सागर जिले में 25 अगस्त, शाम 6 बजे, विट्ठल मंदिर चकरा घाट पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ होगा।
इसका उद्घाटन नगर विधायक श्री शैलेंद्र जैन के आतिथ्य में किया जाएगा।

कार्यशाला के उद्देश्य
  • नागरिकों को प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की बजाय मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाने हेतु प्रेरित करना।
  • पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान सुनिश्चित करना।
  • समाज में छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से बड़ा परिवर्तन लाना।

आयोजकों ने समाजसेवियों, स्वयंसेवी संगठनों, विद्यार्थियों और नगरवासियों से बढ़-चढ़कर सहभागिता करने का आग्रह किया है।


विशेष महत्व

दोनों पहलें—

  • एक ओर गौशाला महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण आजीविका को सशक्त करने का प्रयास हैं।
  • दूसरी ओर ‘माटी गणेश’ अभियान पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने की दिशा में समाज को जोड़ने वाली अनूठी पहल है।

इन प्रयासों से सागर जिले में सशक्त महिला उद्यमिता और पर्यावरण–अनुकूल सामाजिक चेतना दोनों को बल मिलेगा

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