महाराष्ट्र के पालघर जिले के विरार (Vasai-Virar) में बुधवार देर रात घटित हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। विजय नगर स्थित चार मंजिला रमाबाई अपार्टमेंट के हिस्से के गिरने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 9 लोग घायल हैं। हादसे के वक्त चौथी मंजिल पर एक साल की बच्ची का जन्मदिन समारोह चल रहा था, लेकिन खुशियों का वह पल देखते ही देखते मातम में बदल गया। मलबे में दबकर बच्ची, उसकी मां और कई मेहमानों की मौत हो गई।

हादसा कैसे हुआ?
सूत्रों के अनुसार, 26 अगस्त की रात 12:05 बजे अचानक अपार्टमेंट का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर ढह गया।
- यह हिस्सा 12 फ्लैटों का था, जो बगल में बने एक खाली पड़े मकान पर गिरा।
- इमारत 2012 में निर्मित हुई थी और इसमें कुल 50 फ्लैट थे।
- चौथी मंजिल पर चल रही बर्थडे पार्टी के दौरान यह हादसा हुआ, जिससे वहां मौजूद कई लोग दब गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन : मलबे से शव और घायल निकाले गए
- बुधवार को 12 मौतों की पुष्टि हुई थी, गुरुवार सुबह तक 5 और शव बरामद हुए।
- घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में जारी है।
- जिला कलेक्टर डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने पुष्टि की है कि मृतकों में वह बच्ची भी शामिल है, जिसका जन्मदिन मनाया जा रहा था।
- प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें मलबे में फंसे अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं।

लोगों का गुस्सा – बिल्डर और अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप
स्थानीय लोगों ने हादसे के लिए सीधे तौर पर बिल्डर और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।
- निवासियों का आरोप है कि अनाधिकृत और कमजोर निर्माण के बावजूद बिल्डिंग में लोगों को रहने की अनुमति दी गई।
- लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई।
- वसई विरार नगर निगम (VVMC) की शिकायत पर पुलिस ने बिल्डर को गिरफ्तार कर लिया है।
सुरक्षा के मद्देनज़र उठाए गए कदम
- जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी विवेकानंद कदम ने बताया कि एहतियातन अपार्टमेंट के आसपास की सभी चॉल खाली करा दी गई हैं।
- प्रभावित परिवारों को चंदनसर समाजमंदिर में अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया है।
- यहां रहने वालों को भोजन, पानी, चिकित्सा सहायता और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रशासन की कार्रवाई और आगे की राह
वसई विरार नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त संजय हिरवाड़े ने बताया कि अभी भी 2 लोग लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल लगातार मलबा हटाकर खोज अभियान चला रहा है।
इस हादसे ने एक बार फिर मुंबई और आसपास के इलाकों में अनाधिकृत व कमजोर इमारतों के निर्माण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जरूरत है कि जांच केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहे, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो, जिन्होंने समय रहते लापरवाही बरती।