सागर ज़िले की बहुउद्देशीय प्राथमिक शाखा सहकारी समिति, जरूआ में मूंग खरीदी के दौरान बड़ा घोटाला सामने आया है। कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच टीम ने खुलासा किया कि समिति के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर है। यही नहीं, समिति के सहायक प्रबंधक और कंप्यूटर ऑपरेटर पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।
459 क्विंटल मूंग का नहीं मिला हिसाब
कृषि विस्तार और नोडल अधिकारी अनिल मंडलोई ने बताया कि जरूआ वेयरहाउस खरीदी केंद्र का हाल ही में निरीक्षण किया गया। टीम में एसएडीओ चेतन मुजाल्दे, कृषि विस्तार अधिकारी रवि कुमार मोरे, तहसीलदार प्रेम नारायण सिंह, पटवारी रामेश्वर गौड़ समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि खरीदी केंद्र के पोर्टल पर कुल 10,063.20 क्विंटल मूंग की खरीदी दर्ज है। इनमें से 9307.7 क्विंटल मूंग का परिवहन और भंडारण पहले ही किया जा चुका था। ऐसे में केंद्र पर लगभग 755.5 क्विंटल मूंग मौजूद होना चाहिए थी, लेकिन मौके पर सिर्फ 296 क्विंटल अमानक (नॉन-एफएक्यू) मूंग मिली।
इस अंतर से साफ हुआ कि 459.5 क्विंटल मूंग का कोई हिसाब नहीं है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 39 लाख 89 हजार रुपए बताई गई है। इस आधार पर सहायक समिति प्रबंधक संतोष चौबे और कंप्यूटर ऑपरेटर सुनील प्रजापति पर एफआईआर दर्ज की गई है।

दो दिन पहले रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे प्रबंधक
इस घोटाले से पहले भी समिति प्रबंधक संतोष चौबे विवादों में रह चुके हैं। बीते गुरुवार को लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आरोप था कि वे किसानों से मूंग की ग्रेडिंग रिपोर्ट सही करने, वेयरहाउस में भंडारण कराने और ट्रांसपोर्ट चार्ज (टीसी) जारी करने के बदले रिश्वत की मांग कर रहे थे।
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद ही प्रशासन ने खरीदी केंद्र में गड़बड़ियों की गहन जांच शुरू की। इसी जांच में अब यह करोड़ों का घोटाला सामने आया है।
किसानों के साथ बड़ा अन्याय
इस पूरे मामले से किसानों में गहरी नाराज़गी है। जिन किसानों ने दिन-रात मेहनत करके मूंग की उपज मंडी तक पहुंचाई, उनकी उपज का सही रिकॉर्ड न रखकर और अमानक मूंग दिखाकर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। किसानों का आरोप है कि समिति के पदाधिकारी और कर्मचारी मिलकर लंबे समय से इस तरह का खेल कर रहे थे।
अब होगा बड़ा खुलासा?
डीआरआई और लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद जिस तरह से यह अनियमितता सामने आई है, उससे यह सवाल उठ रहा है कि जरूआ ही नहीं, बल्कि जिले की अन्य समितियों में भी इसी तरह का भ्रष्टाचार चल रहा होगा। अधिकारियों का कहना है कि जरूआ समिति प्रकरण से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
✅ मुख्य बिंदु संक्षेप में
- जरूआ समिति में खरीदी गई मूंग का बड़ा हिस्सा गायब।
- 459.5 क्विंटल मूंग का हिसाब नहीं, कीमत करीब 40 लाख।
- सहायक प्रबंधक और ऑपरेटर पर एफआईआर दर्ज।
- दो दिन पहले ही 1 लाख की रिश्वत लेते पकड़े गए थे प्रबंधक।
- किसानों के हितों पर डाका डालने का आरोप।