भोपाल उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला : रिलायंस स्मार्ट स्टोर ने वसूले 19 रुपए ज्यादा;

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भोपाल, 30 अगस्त।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, भोपाल ने एक अहम आदेश सुनाते हुए रिलायंस रिटेल लिमिटेड और अयोध्या बायपास स्थित रिलायंस स्मार्ट स्टोर को उपभोक्ता से वसूली गई अतिरिक्त राशि ब्याज सहित लौटाने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कंपनी पर सेवा में कमी और मानसिक कष्ट के एवज में हर्जाना भी ठोका है। यह फैसला आयोग की बेंच-1 के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल और सदस्य डॉ. प्रतिभा पांडे ने 18 अगस्त को सुनाया।


मामला क्या है?

यह मामला उपभोक्ता हरीश गेहलोत से जुड़ा है।

  • गेहलोत ने 9 मई 2024 को अयोध्या बायपास स्थित रिलायंस स्मार्ट स्टोर से जिलेट प्रेस्टो-3 का एक पैकेट खरीदा था।
  • इस पैकेट की MRP केवल 150 रुपए अंकित थी, लेकिन स्टोर ने इसके लिए उनसे 169 रुपए वसूले।
  • इस तरह 19 रुपए ज्यादा वसूले गए।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि बिल में जीएसटी की राशि भी 25.82 रुपए अतिरिक्त ली गई। उन्होंने स्टोर पर अनुचित व्यापार प्रथा अपनाने का आरोप लगाते हुए आयोग से 49 लाख रुपए हर्जाने और 75 हजार रुपए परिवाद व्यय दिलाने की मांग की थी।


कंपनी की दलीलें

कंपनी की ओर से आयोग के सामने यह दलील दी गई—

  • संबंधित जिलेट प्रेस्टो पैक बिक्री हेतु उपलब्ध ही नहीं था।
  • सिस्टम में कीमत अपडेट न होने से यह स्थिति बनी।
  • ग्राहक को बताया गया था कि यह प्रोडक्ट बिक्री हेतु नहीं है और गलती से बिलिंग हो गई।
  • उन्हें विकल्प दिया गया था कि वे दूसरा उत्पाद ले लें या पैसा वापस कर दिया जाएगा।
  • कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता ने स्टोर कर्मचारियों और मैनेजर से अभद्र व्यवहार किया।

आयोग ने खारिज की कंपनी की सफाई

आयोग ने रिलायंस स्मार्ट स्टोर की इन दलीलों को साफ तौर पर खारिज कर दिया। आयोग ने कहा—

  • यदि कोई उत्पाद बिक्री हेतु नहीं है, तो उसे ग्राहकों की पहुंच में क्यों रखा गया?
  • यह स्टोर प्रबंधन की लापरवाही और अनुचित व्यापार प्रथा का प्रमाण है।
  • उपभोक्ता से अधिक मूल्य वसूला गया, जिससे उसे नुकसान और मानसिक कष्ट झेलना पड़ा।

आयोग का आदेश

आयोग की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि रिलायंस रिटेल लिमिटेड और रिलायंस स्मार्ट स्टोर—

  1. 19 रुपए अतिरिक्त वसूली की राशि उपभोक्ता को 9% वार्षिक ब्याज सहित दो माह के भीतर लौटाएं।
  2. सेवा में कमी और मानसिक कष्ट के लिए उपभोक्ता को 3,000 रुपए हर्जाना दें।
  3. मुकदमे के खर्च के रूप में 1,000 रुपए अतिरिक्त अदा करें।
  4. यदि कंपनी तय समय में राशि नहीं लौटाती है, तो परिवाद प्रस्तुति की तारीख से अदायगी की तारीख तक पूरी राशि पर 9% वार्षिक ब्याज लागू होगा।

उपभोक्ताओं के लिए संदेश

यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। आयोग ने स्पष्ट किया कि छोटी रकम भी उपभोक्ता से गलत तरीके से वसूलना अनुचित व्यापार प्रथा है और इसके लिए कंपनी जिम्मेदार होगी।

इस आदेश ने उपभोक्ताओं को यह भरोसा दिलाया है कि—

  • वे छोटे से छोटे विवाद में भी न्याय पा सकते हैं।
  • बड़ी कंपनियों को भी उपभोक्ता अधिकारों का सम्मान करना होगा।

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