अशोकनगर में कलेक्टर का निरीक्षण दौरा: आंगनबाड़ी और स्कूलों की पोल खुली,

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अशोकनगर।
जिले में शिक्षा और पोषण व्यवस्था की हकीकत सामने लाने के उद्देश्य से अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह ने गुरुवार को विकासखंड के विभिन्न गांवों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सोबत, मसीदपुर और सोनेरा गांव के आंगनबाड़ी केंद्रों और शासकीय विद्यालयों का जायजा लिया। निरीक्षण में कई खामियां उजागर हुईं, जिस पर कलेक्टर ने संबंधित जिम्मेदारों को फटकार लगाते हुए तत्काल सुधार और कार्रवाई के निर्देश दिए।


सोबत गांव: आंगनबाड़ी में बच्चों की संख्या बेहद कम

कलेक्टर जब सोबत गांव के आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे तो यहां बच्चों की उपस्थिति बेहद कम पाई गई। इतना ही नहीं, केंद्र में बच्चों के खेलने के लिए कोई भी खेल सामग्री उपलब्ध नहीं थी। इस पर कलेक्टर ने सीडीपीओ को तुरंत खेल सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही कार्यकर्ताओं को आदेश दिया कि वे गांव में जाकर अभिभावकों को जागरूक करें ताकि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।


मसीदपुर गांव: लकड़ी के चूल्हे पर मध्यान्ह भोजन

मसीदपुर के प्राथमिक विद्यालय में कलेक्टर को और भी चौंकाने वाली लापरवाही मिली। यहां मध्यान्ह भोजन लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जा रहा था, जबकि शासन स्तर से गैस सुविधा की व्यवस्था की गई है। कलेक्टर ने एसडीएम को तत्काल गैस चूल्हा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
विद्यालय का रिकॉर्ड भी अव्यवस्थित पाया गया और छात्रों की अनुपस्थिति अधिक मिली। इस पर कलेक्टर ने विद्यालय के प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दिए।


सोनेरा गांव: रिकॉर्ड गायब और गलत जानकारी

सोनेरा गांव के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-1 में अगस्त माह का बच्चों का वजन रिकॉर्ड उपलब्ध ही नहीं था। कार्यकर्ता मुननी रघुवंशी द्वारा गलत जानकारी दी गई, जिसे कलेक्टर ने गंभीर लापरवाही माना। इस पर उन्होंने कार्यकर्ता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।


सड़क और विद्यालय सुधार के आदेश

सोबत गांव की अनुसूचित जाति बस्ती में सड़क की हालत बेहद खराब मिली। कलेक्टर ने तत्काल सड़क मरम्मत कराने के निर्देश दिए। साथ ही प्राथमिक विद्यालय में भी सुधार कार्य करवाने को कहा।


कुपोषण पर विशेष फोकस

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सभी केंद्रों में पोषण आहार वितरण, गर्भवती और धात्री महिलाओं की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन बच्चों में कुपोषण के लक्षण दिखाई दें, उन्हें तत्काल एनआरसी (Nutrition Rehabilitation Centre) में भर्ती कराया जाए ताकि समय रहते उनका इलाज और देखभाल हो सके।


प्रशासनिक सख्ती और सुधार का संदेश

कलेक्टर आदित्य सिंह का यह औचक निरीक्षण न केवल व्यवस्थाओं की खामियां उजागर करने वाला रहा बल्कि इससे प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही का स्पष्ट संदेश भी गया। उन्होंने साफ कहा कि बच्चों की शिक्षा और पोषण में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी

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