सागर में विमुक्ति उत्सव का आयोजन, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदाय के इतिहास को किया याद !

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स्वतंत्र भारत के इतिहास में 11 अगस्त 1951 का दिन एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसी दिन औपनिवेशिक काल का अपराध जनजाति अधिनियम 1871 समाप्त किया गया था, जिसके चलते विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदायों को दशकों से मिले अन्यायपूर्ण कलंक से मुक्ति मिली थी। इस ऐतिहासिक क्षण की स्मृति में प्रत्येक वर्ष विमुक्ति दिवस मनाया जाता है। इसी क्रम में इस वर्ष भी सागर जिले में विमुक्ति उत्सव का आयोजन बड़े उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ।

विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्ध घुमन्तु कल्याण विभाग सागर द्वारा यह आयोजन पोस्ट मैट्रिक छात्रावास सागर में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संयुक्त कलेक्टर सुश्री राज नंदिनी शर्मा ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि यह समुदाय लंबे समय तक अंग्रेजों की औपनिवेशिक नीतियों के कारण पीड़ा झेलता रहा। स्वतंत्रता के बाद इन समुदायों को आज़ादी का सच्चा अनुभव 1951 में मिला, जब उन्हें “अपराधी” कहे जाने का अन्यायपूर्ण कलंक मिटा दिया गया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा, कौशल विकास और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर समाज में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करें।

कार्यक्रम में विमुक्त जाति समुदाय के जनप्रतिनिधि श्री वीर सिंह छारी और श्री महेश पाल ने भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विमुक्ति दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी पहचान और संघर्ष की गाथा है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे हमारे पूर्वजों ने सामाजिक उपेक्षा के बावजूद अपनी संस्कृति और परंपराओं को जिंदा रखा।

सहायक संचालक श्रीमती सपना चौरसिया ने विभागीय योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु समुदायों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें शिक्षा छात्रवृत्ति, आवासीय सुविधा, स्वरोजगार योजनाएं, कौशल विकास प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और हर परिवार आत्मनिर्भर बने।

कार्यक्रम में छात्रावास में रह रहे विद्यार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी की। बच्चों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि इस दिन का महत्व उनके लिए विशेष है क्योंकि यह उन्हें अपने अधिकारों और अवसरों की याद दिलाता है। कुछ विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिनमें समुदाय की पारंपरिक लोकधुनें और नृत्य शामिल थे।

इस अवसर पर जिले के अन्य अधिकारीगण, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक भी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस दिन को समुदाय की अस्मिता और आत्मसम्मान से जोड़ते हुए इसे प्रेरणा का पर्व बताया।

कार्यक्रम का संचालन विभागीय अधिकारी ने किया और अंत में आभार प्रदर्शन सहायक संचालक सपना चौरसिया द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि विमुक्ति दिवस केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह समुदाय को नई ऊर्जा और सकारात्मक दिशा देने का संकल्प है।

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