सागर– श्री गौर गोविंद मंदिर में रविवार को श्री राधा अष्टमी महोत्सव का आयोजन बड़े भक्तिभाव और आध्यात्मिक उल्लास के साथ किया गया। यह आयोजन चैतन्य महाप्रभु अस्पताल परिवार की ओर से संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर युवा नेता श्री अविराज सिंह ने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया और श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ईश्वर तक पहुंचने का सबसे सरल मार्ग निस्वार्थ प्रेम और भक्ति है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रिय श्री राधा का जन्म केवल एक कन्या के रूप में नहीं हुआ था, बल्कि वे भक्ति और प्रेम का साक्षात स्वरूप हैं। शास्त्रों के अनुसार “राधा बिना कृष्ण अधूरे हैं और कृष्ण बिना राधा अधूरे हैं।” श्री राधा प्रेम, समर्पण, त्याग और भक्ति की प्रतीक हैं। उनकी भक्ति से हमें यह संदेश मिलता है कि भौतिक दुनिया की उलझनों से ऊपर उठकर, यदि हम निस्वार्थ भाव से ईश्वर की शरण लेते हैं तो जीवन सफल हो जाता है।

अविराज सिंह ने कहा कि भूमि तत्व, जल तत्व, अग्नि तत्व, वायु तत्व, व्योम तत्व और ब्रह्म तत्व – इन सभी का मूल सार श्रीकृष्ण हैं और श्रीकृष्ण का सार स्वयं श्री राधा हैं। यही कारण है कि श्री राधारानी को ब्रह्मांड की सबसे महान भक्त और प्रेम की प्रतिमूर्ति माना जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि आज श्री गौर मंदिर में श्री राधा अष्टमी के पर्व में सहभागी होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसमें भक्ति, माधुर्य और करुणा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर संगीतमय भजनों, आरती और मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।

युवा नेता ने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। “जब हम सब एक साथ मिलकर ईश्वर के नाम का स्मरण करते हैं तो हमारी सामूहिक चेतना शुद्ध होती है और जीवन में शांति, संतोष और आनंद की वृद्धि होती है।” उन्होंने यह भी कहा कि श्री राधारानी की कृपा से ही भक्तों का जीवन आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर होता है और वह ईश्वर के सान्निध्य को प्राप्त करता है।
उन्होंने आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस भव्य आयोजन के लिए डॉ. पी.एस. ठाकुर, डॉ. लक्ष्मी ठाकुर और चैतन्य महाप्रभु अस्पताल परिवार का हृदय से साधुवाद और अभिनंदन है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज की परंपराओं को जीवित रखते हैं और नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ते हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं और युवा उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से आरती में भाग लिया और श्री राधा-कृष्ण की स्तुति करते हुए अपने जीवन में शांति और समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण और भजन संध्या के साथ हुआ।
श्री राधा अष्टमी का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि सच्चे अर्थों में ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग किसी कठिन साधना में नहीं, बल्कि निस्वार्थ प्रेम और भक्ति में निहित है।