सागर में विमुक्ति उत्सव का आयोजन, समुदाय की आजादी की स्मृति में हुआ कार्यक्रम

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सागर, 31 अगस्त 2025।
औपनिवेशिक काल के अन्यायपूर्ण कानूनों से मुक्ति की याद में रविवार को विमुक्ति उत्सव का आयोजन किया गया। स्वतंत्रता के पश्चात् आपे्राधिक जनजाति अधिनियम 1871 को 11 अगस्त 1951 को समाप्त किया गया था। इसी दिन विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्ध घुमन्तु समुदाय को सच्चे अर्थों में आजादी प्राप्त हुई। इसी ऐतिहासिक क्षण की स्मृति में प्रतिवर्ष विमुक्ति दिवस मनाया जाता है।

पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में हुआ कार्यक्रम

इस वर्ष विमुक्ति दिवस का आयोजन पोस्ट मैट्रिक छात्रावास, सागर में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समुदाय के लोगों को उनके अधिकारों, योजनाओं और आजादी के महत्व से अवगत कराना रहा।

विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्ध घुमन्तु कल्याण विभाग की सहायक संचालक श्रीमती सपना चौरसिया ने बताया कि विभाग द्वारा समय-समय पर विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनसे समुदाय के विद्यार्थियों, महिलाओं और युवाओं को लाभ मिल रहा है।

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में संयुक्त कलेक्टर सुश्री राज नंदिनी शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा –
“विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्ध घुमन्तु समुदाय स्वतंत्र भारत के समान नागरिक हैं। उनके सामाजिक और शैक्षिक उत्थान के लिए शासन निरंतर कार्य कर रहा है।”

इस अवसर पर समुदाय के जनप्रतिनिधि श्री वीरसिंह छारी और श्री महेश पाल ने भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने विमुक्ति दिवस को आत्मसम्मान और अधिकारों के प्रतीक के रूप में बताया।

योजनाओं की जानकारी

जिला कार्यालय, विमुक्त घुमन्तू विभाग की ओर से संचालित सभी प्रकार की शैक्षिक एवं सामाजिक कल्याण योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। विद्यार्थियों और समुदाय के लोगों को छात्रवृत्ति, आवास, रोजगार और प्रशिक्षण योजनाओं के बारे में जागरूक किया गया।

उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ आयोजन

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, अभिभावक और समुदाय के लोग मौजूद रहे। उत्सव के दौरान उपस्थित जनों ने 1951 की ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए उन पीढ़ियों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने समाज में न्याय और समानता की लड़ाई लड़ी थी।

कार्यक्रम का संचालन विभागीय अधिकारियों ने किया तथा अंत में आभार व्यक्त कर विमुक्ति दिवस कार्यक्रम का समापन किया गया।

संक्षेप में

विमुक्ति दिवस का यह आयोजन न केवल समुदाय के इतिहास और संघर्ष की याद दिलाता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने की दिशा में भी प्रेरित करता है।

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