भोपाल/विदिशा।
मध्यप्रदेश की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच में सामने आए साइंस हाउस ग्रुप घोटाले ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की खरीद प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आयकर विभाग की हालिया छापेमारी के बाद फिर सुर्खियों में आए इस मामले में ग्रुप के संचालक जितेंद्र तिवारी की गिरफ्तारी पहले ही ईओडब्ल्यू कर चुकी है। तिवारी को दिल्ली एयरपोर्ट से सीआईएसएफ ने हिरासत में लिया था, जब वह दो महीने तक चीन में रुकने के बाद भारत लौटा था।

अनूपपुर की खरीदी से खुला राज
जांच के मुताबिक, अनूपपुर जिले में साल 2019-20 में दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीदी में भारी गड़बड़ी की गई थी।
- साइंस हाउस मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड सहित तीन कंपनियों ने मिलकर बिड प्रक्रिया में धांधली की और मनमाने दामों पर सप्लाई का प्रस्ताव पास कराया।
- इससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।
- मामले में तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. बीडी सोनवानी, क्रय समिति अध्यक्ष व अपर कलेक्टर समेत कई डॉक्टरों को भी आरोपी बनाया गया था।
पूरा परिवार था शामिल
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि तिवारी परिवार ने तीन अलग-अलग कंपनियां बना रखी थीं, लेकिन सभी की डोर एक ही परिवार के हाथों में थी।
- जितेंद्र तिवारी, उसके भाई शैलेंद्र तिवारी और पत्नी अनुजा तिवारी प्रमुख भूमिकाओं में थे।
- इसके अलावा महेश बाबू शर्मा और उनकी कंपनी सिन्को इंडिया भी जांच के घेरे में आई।
- दवा और उपकरण खरीदी में गड़बड़ी के सबूत जब्त दस्तावेजों और कम्प्यूटर हार्ड डिस्क से मिले।
चीन कनेक्शन ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
ईओडब्ल्यू की कार्रवाई के पहले ही आयकर विभाग ने भोपाल में साइंस हाउस ग्रुप पर छापे डाले थे। दस्तावेजों से यह भी सामने आया कि जितेंद्र तिवारी न सिर्फ दवा सप्लाई में, बल्कि चीन से उपकरणों और अन्य प्रोडक्ट्स की डीलिंग में भी शामिल रहा है।
- पिछले साल वह अपने दोस्तों के साथ दो महीने तक चीन में रुका था।
- वहां से लौटते ही दिल्ली एयरपोर्ट पर उसकी गिरफ्तारी हुई।
- अधिकारियों का मानना है कि यह कनेक्शन सप्लाई की फर्जी बिलिंग और ओवरप्राइसिंग से जुड़ा हो सकता है।
विदिशा से भोपाल तक का सफर
जितेंद्र तिवारी का परिवार मूल रूप से विदिशा जिले का रहने वाला है।
- उसके पिता वहां लेक्चरर रहे हैं।
- पढ़ाई पूरी करने के बाद भाईयों ने भोपाल में कारोबार जमाया और धीरे-धीरे दवाओं की सप्लाई का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया।
- इस दौरान उन्होंने रियल एस्टेट सेक्टर में भी मोटा निवेश किया और शहर के पॉश इलाकों में प्रॉपर्टी खरीदी।
ईओडब्ल्यू की कार्रवाई और आगे की जांच
- जून 2024 में ईओडब्ल्यू ने अनूपपुर मामले में जितेंद्र तिवारी की गिरफ्तारी की थी।
- उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया गया था, ताकि विदेश से लौटते ही उसे पकड़ा जा सके।
- अब आयकर विभाग और ईओडब्ल्यू मिलकर चीन कनेक्शन, ओवर इनवॉयसिंग और मनी ट्रेल की जांच कर रहे हैं।
निष्कर्ष
साइंस हाउस ग्रुप पर उठे सवाल केवल एक कंपनी या परिवार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये प्रदेश में सरकारी दवा और उपकरण खरीदी की पारदर्शिता पर गहरा प्रहार करते हैं। करोड़ों के इस खेल में सत्ता-प्रशासन से जुड़े चेहरों की भूमिका भी जांच एजेंसियों के राडार पर है। जितेंद्र तिवारी की गिरफ्तारी और चीन कनेक्शन से यह साफ है कि मामला अभी और बड़ा खुल सकता है।