बीना में प्रशासनिक कामकाज ठप: अधिकारियों की कमी से जनता बेहाल

Spread the love

बीना। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो गया है। वजह है—अधिकारियों की कमी। नगर पालिका से लेकर तहसील और जनपद पंचायत तक प्रमुख पदों पर अधिकारी नदारद हैं। इससे फाइलें अटक गई हैं और आमजन के काम समय पर नहीं हो पा रहे।

नपा सीएमओ 40 दिन से निलंबित

नगर पालिका परिषद (नपा) बीना के सीएमओ रामप्रकाश जगनेरिया को भाजपा विरोधी नारेबाजी के मामले में करीब 40 दिन पहले निलंबित कर दिया गया था। उनकी जगह शाहगढ़ नपा सीएमओ विनय मिश्रा को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। लेकिन वे सप्ताह में केवल एक-दो दिन ही बीना पहुंच पाते हैं। परिणामस्वरूप नगर पालिका की अधिकांश फाइलें लंबित हैं और स्वच्छता, सड़क, पेयजल जैसी मूलभूत योजनाएं ठप पड़ी हैं।

जनपद पंचायत और सब रजिस्ट्रार दफ्तर पर असर

जनपद पंचायत बीना के सीईओ शंकरलाल कुरेले रिटायर हो चुके हैं। फिलहाल आरईएस एसडीओ ऋतु जैन को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वही स्थिति सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में भी है। बीना से उप पंजीयक अभिषेक वर्मा का तबादला हो चुका है। उनकी जगह देवरी के उप पंजीयक नरेश राजपूत को प्रभार सौंपा गया है। लेकिन वे भी सप्ताह में केवल तीन दिन ही बीना आते हैं। ऐसे में भूमि पंजीयन और दस्तावेज सत्यापन का काम प्रभावित हो रहा है।

तहसील प्रशासन भी अधर में

तहसील स्तर पर भी हालात चुनौतीपूर्ण हैं। बीना के एसडीएम विजय डेहरिया का छतरपुर तबादला हो चुका है, जबकि नए डिप्टी कलेक्टर ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। नायब तहसीलदार हेमराज मेहर का तबादला आदेश दो महीने पहले ही जारी हो चुका है। इधर तहसीलदार डॉ. अंबर पंथी हाथ में फ्रैक्चर के कारण अवकाश पर हैं। ऐसे में राजस्व संबंधी कार्य जैसे नामांतरण, बंटवारा, ऋण पुस्तिका प्रमाणपत्र और अन्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

जनता परेशान, काम लटक रहे

नगर पालिका और तहसील कार्यालय में रोजाना बड़ी संख्या में लोग अपने काम लेकर पहुंचते हैं। लेकिन अधिकारियों की अनुपस्थिति और प्रभार व्यवस्था के कारण उन्हें बार-बार लौटना पड़ रहा है। नपा के कर्मचारी मानते हैं कि सफाई व्यवस्था और अन्य योजनाओं पर भी असर पड़ा है। वहीं किसान और ग्रामीण जनपद पंचायत के कामकाज न होने से परेशान हैं।

मामला शासन स्तर का

इस पर पूर्व एसडीएम विजय डेहरिया ने स्पष्ट किया कि “तबादला और पोस्टिंग पूरी तरह शासन स्तर का विषय है। उच्च अधिकारियों से निर्देश मिलने के बाद ही व्यवस्था सुधरेगी।”

स्थानीय लोग अब शासन और प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही पदस्थापन और प्रभार की स्थिति स्पष्ट हो, ताकि शहर और ग्रामीण अंचलों के ठप पड़े कार्य दोबारा पटरी पर लौट सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *