बीना के नानक वार्ड में चोरियों से हाहाकार: पुलिस की निष्क्रियता से परेशान

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बीना, सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले के बीना शहर के नानक वार्ड में चोरियों की बढ़ती घटनाओं ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। पुलिस की नाकामी और निष्क्रियता से तंग आकर वार्डवासियों ने अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद अपने हाथों में ले ली है। पिछले तीन दिनों से वार्ड के युवा और वरिष्ठ नागरिक मिलकर रात में चौकीदारी कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने 4-5 लोगों की टीमें बनाकर गश्त शुरू की है और एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।

चोरियों का बढ़ता सिलसिला और पुलिस की नाकामी

नानक वार्ड में पिछले कुछ समय से चोरियां और संदिग्ध गतिविधियों की घटनाएं बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि चोर रात के समय घरों में सेंधमारी कर रहे हैं, जिससे वार्ड में दहशत का माहौल है। वार्ड पार्षद बी.डी. रजक ने बताया कि चोरी की कई घटनाओं की शिकायत पुलिस को की गई, लेकिन स्टाफ की कमी का हवाला देकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। निवासियों ने पुलिस चौकी के सामने धरना भी दिया और अधिकारियों से गश्त बढ़ाने की मांग की। हालांकि, पुलिस ने केवल आश्वासन दिया, लेकिन न तो रात की गश्त बढ़ी और न ही चौकी में अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती हुई।

युवाओं ने संभाली कमान: रात में गश्त और “जागते रहो”

पुलिस की निष्क्रियता से परेशान होकर नानक वार्ड के युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने खुद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला किया। स्थानीय युवाओं ने 4-5 लोगों की छोटी-छोटी टीमें बनाई हैं, जो रात में अलग-अलग समय पर गलियों में गश्त करती हैं। ये टीमें लाठी, बल्ले और टॉर्च लेकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखती हैं। गश्त के दौरान लोग “जागते रहो” की आवाज लगाकर आसपास के निवासियों को भी सतर्क करते हैं।

एक स्थानीय युवा, राहुल ठाकुर, ने बताया, “पुलिस पर भरोसा करके हम थक चुके हैं। हर रात चोरी की आशंका में लोग डर के साये में सो रहे हैं। इसलिए हमने खुद गश्त शुरू की है। हमारी टीमें रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक बारी-बारी से गलियों में घूमती हैं।”

व्हाट्सएप ग्रुप से निगरानी

नानक वार्ड के निवासियों ने तकनीक का सहारा लेते हुए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है, जिसमें वार्ड के अधिकांश लोग शामिल हैं। इस ग्रुप के जरिए संदिग्ध गतिविधियों, अजनबी व्यक्तियों, या किसी भी असामान्य घटना की जानकारी तुरंत साझा की जाती है। रात में गश्त करने वाली टीमें भी ग्रुप पर अपडेट देती रहती हैं। एक निवासी, श्याम सुंदर, ने कहा, “व्हाट्सएप ग्रुप ने हमें एकजुट किया है। अगर कोई संदिग्ध गतिविधि दिखती है, तो तुरंत सभी को अलर्ट कर दिया जाता है। इससे हमारी सतर्कता बढ़ी है।”

वार्ड पार्षद और निवासियों की मांग

वार्ड पार्षद बी.डी. रजक ने बताया कि पुलिस प्रशासन को बार-बार चोरी की घटनाओं की जानकारी दी गई, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। उन्होंने कहा, “हमने पुलिस से रात में गश्त बढ़ाने और चौकी में स्टाफ की तैनाती की मांग की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब निवासियों को मजबूरन खुद अपनी सुरक्षा करनी पड़ रही है।” निवासियों ने चेतावनी दी है कि जब तक पुलिस ठोस कदम नहीं उठाती, वे अपनी सुरक्षा के लिए गश्त और निगरानी जारी रखेंगे।

सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव

नानक वार्ड में निवासियों द्वारा खुद सुरक्षा व्यवस्था संभालने की घटना ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की निष्क्रियता ने उन्हें मजबूर किया है कि वे अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए खुद कदम उठाएं। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश साहू ने कहा, “यह स्थिति चिंताजनक है कि आम नागरिकों को अपनी सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। पुलिस को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।”

पुलिस का पक्ष

मोतीनगर थाना प्रभारी ने बताया कि चोरी की घटनाओं की शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा, “हमारे पास स्टाफ की कमी है, लेकिन हम गश्त बढ़ाने और अपराधियों को पकड़ने के लिए प्रयासरत हैं। जल्द ही स्थिति नियंत्रण में होगी।” हालांकि, निवासियों का कहना है कि पुलिस के ये दावे केवल कागजी हैं और जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं दिख रहा।

निष्कर्ष

बीना के नानक वार्ड में चोरियों की बढ़ती घटनाओं ने स्थानीय निवासियों को अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं कदम उठाने को मजबूर कर दिया है। युवाओं की गश्त टीमें और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए निगरानी एक अनूठा उदाहरण है कि कैसे समुदाय एकजुट होकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है। हालांकि, यह स्थिति पुलिस प्रशासन की नाकामी को दर्शाती है। निवासियों की मांग है कि पुलिस गश्त बढ़ाए, चौकी में स्टाफ की तैनाती करे, और चोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे ताकि वार्ड में शांति और सुरक्षा बहाल हो सके।

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