सागर में यूरिया खाद के लिए किसानों की लंबी कतारें: सुबह 3 बजे से लाइन में

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सागर, मध्य प्रदेश: सागर जिले में यूरिया खाद की कमी और वितरण में देरी के कारण किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। मंगलवार, 2 सितंबर 2025 को एमपी एग्रो के वितरण केंद्र पर यूरिया खाद लेने के लिए किसानों की लंबी कतारें देखी गईं। सोमवार को यूरिया की नई खेप पहुंचने की सूचना मिलते ही किसान सुबह 3 बजे से ही लाइन में लग गए। कई किसानों ने बताया कि घंटों इंतजार के बावजूद उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है, जिससे उनकी फसलों को नुकसान होने की आशंका बढ़ रही है।

किसानों की परेशानी: सुबह 3 बजे से लाइन में

सागर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने एमपी एग्रो के वितरण केंद्र पर सुबह तड़के से ही कतारें लगा दीं। किसान भगवान सिंह बछउ, मुकेश मुहली, और अमित मुहली ने बताया कि वे सुबह 7:30 बजे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन दोपहर तक उनका नंबर नहीं आया। कुछ किसानों ने तो रात 3 बजे से ही लाइन में लगना शुरू कर दिया था। भगवान सिंह ने कहा, “हमारी फसलें खेतों में खड़ी हैं, और समय पर यूरिया नहीं मिलने से पैदावार पर असर पड़ेगा। इतनी मेहनत और इंतजार के बाद भी खाद मिलना मुश्किल हो रहा है।”

किसानों का कहना है कि यूरिया की कमी और वितरण में अव्यवस्था के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ ने कालाबाजारी की आशंका भी जताई, क्योंकि निजी दुकानों पर यूरिया निर्धारित मूल्य से अधिक दामों पर बिक रहा है।

यूरिया का वितरण: 60 मीट्रिक टन की खेप

कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (SADO) राजू चौहान ने बताया कि एमपी एग्रो में 60 मीट्रिक टन यूरिया खाद की खेप सोमवार को पहुंची थी, जिसका वितरण मंगलवार से शुरू किया गया। इसके अलावा, जिले की विभिन्न सहकारी समितियों को भी यूरिया भेजा गया है। वितरण का ब्यौरा इस प्रकार है:

  • बारधा समिति: 15 मीट्रिक टन
  • बरोदियानौनगर: 15 मीट्रिक टन
  • विनायठा: 15 मीट्रिक टन
  • रूसल्ला: 15 मीट्रिक टन
  • खजराहरचंद: 15 मीट्रिक टन
  • गढोलाजागीर: 15 मीट्रिक टन

चौहान ने कहा कि किसान इन समितियों के माध्यम से भी यूरिया खाद प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, किसानों का कहना है कि समितियों में भी स्टॉक सीमित है और मांग की तुलना में आपूर्ति अपर्याप्त है।

यूरिया की कमी और कालाबाजारी की शिकायतें

सागर जिले में यूरिया खाद की कमी कोई नई समस्या नहीं है। हाल के महीनों में, खासकर खरीफ सीजन के दौरान, किसानों को यूरिया के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। कई जगहों पर निजी दुकानदारों द्वारा यूरिया को निर्धारित मूल्य 266 रुपये प्रति बोरी की जगह 350-400 रुपये में बेचे जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

किसान मुकेश मुहली ने बताया, “सहकारी समितियों में खाद जल्दी खत्म हो जाता है, और हमें निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदना पड़ता है। प्रशासन को इस कालाबाजारी पर रोक लगानी चाहिए।”

सरकारी दावे और जमीनी हकीकत

केंद्र और राज्य सरकार ने दावा किया है कि मध्य प्रदेश में यूरिया की कोई कमी नहीं है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में कहा था कि प्रदेश में 7.3 लाख मीट्रिक टन यूरिया का वितरण 1 अक्टूबर 2024 से 18 नवंबर 2024 तक हो चुका है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग बराबर है। हालांकि, सागर जैसे जिलों में जमीनी हकीकत इसके उलट है। किसानों को खाद के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, और कई बार खाली हाथ लौटना पड़ता है।

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