दमोह में खाद वितरण के दौरान अव्यवस्था:

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दमोह, मध्य प्रदेश: मंगलवार, 2 सितंबर 2025 को दमोह के स्टेशन चौराहे पर स्थित एमपी स्टेट एग्रो के कार्यालय में यूरिया खाद वितरण के दौरान भारी अव्यवस्था फैल गई। बड़ी संख्या में किसानों की भीड़ जमा होने से सड़क पर जाम लग गया, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को खाद वितरण अ临時停止 करना पड़ा। कलेक्टर सुधीर कोचर के निर्देश पर नायब तहसीलदार रघुनंदन चतुर्वेदी मौके पर पहुंचे और व्यवस्था बनाने का प्रयास किया। एमपी स्टेट एग्रो के डीएमओ साकेत गोस्वामी ने इस अव्यवस्था की पुष्टि की और बताया कि टोकन सिस्टम के जरिए अब व्यवस्थित वितरण की कोशिश की जा रही है।

क्या हुआ मंगलवार को?

मंगलवार सुबह से ही एमपी स्टेट एग्रो के कार्यालय में यूरिया खाद लेने के लिए सैकड़ों किसान जमा हो गए। सोमवार को यूरिया की नई खेप पहुंचने की खबर फैलने के बाद किसानों की भीड़ बढ़ती गई। सुबह से ही लंबी कतारें लग गईं, और दोपहर तक स्थिति बेकाबू हो गई। भीड़ के कारण स्टेशन चौराहे पर जाम लग गया, जिससे स्थानीय लोगों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

किसानों का कहना था कि खाद की कमी और वितरण में देरी के कारण उनकी फसलों को नुकसान हो रहा है। एक किसान, रामस्वरूप पटेल, ने बताया, “हम सुबह 4 बजे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन नंबर आने तक खाद खत्म हो जाता है। हाइब्रिड मक्का की फसल के लिए समय पर खाद जरूरी है, वरना पैदावार कम हो जाएगी।”

प्रशासन का हस्तक्षेप

स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलते ही कलेक्टर सुधीर कोचर ने नायब तहसीलदार रघुनंदन चतुर्वेदी को मौके पर भेजा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया। अधिकारियों ने अव्यवस्था के कारण मंगलवार को खाद वितरण अ临時停止 कर दिया। डीएमओ साकेत गोस्वामी ने बताया कि मंगलवार को लगभग 70 किसानों को टोकन वितरित किए गए, जिन्हें बुधवार से मंडी परिसर में खाद दी जाएगी। इसके अलावा, बुधवार को 60-70 नए किसानों को टोकन दिए जाएंगे, जिन्हें अगले दिन खाद वितरित की जाएगी।

हाइब्रिड मक्का की बुवाई और खाद की मांग

दमोह जिले में इस साल हाइब्रिड मक्का की बुवाई बड़े पैमाने पर की गई है, खासकर तेंदूखेड़ा क्षेत्र में। इस फसल की खेती में तीन बार खाद (यूरिया और डीएपी) डालने की जरूरत होती है, जिसके कारण खाद की मांग में भारी वृद्धि हुई है। डीएमओ गोस्वामी ने बताया कि जिले में यूरिया और डीएपी की आपूर्ति सीमित है, जबकि मांग पिछले साल की तुलना में दोगुनी हो गई है। उन्होंने कहा, “हाइब्रिड मक्का की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर अधिक खाद की जरूरत होती है, और इस साल मक्का का रकबा बढ़ने से मांग में इजाफा हुआ है।”

कालाबाजारी की आशंका

किसानों ने खाद की कमी के साथ-साथ कालाबाजारी की शिकायत भी की है। कई किसानों का आरोप है कि निजी दुकानों पर यूरिया और डीएपी निर्धारित मूल्य से अधिक दामों पर बेचा जा रहा है। एक किसान, बृजेंद्र कुसमरिया, ने कहा, “सहकारी समितियों में खाद जल्दी खत्म हो जाता है, और निजी दुकानों पर 400-500 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से खाद मिल रहा है। प्रशासन को इस पर सख्ती करनी चाहिए।”

प्रशासन की रणनीति

कलेक्टर सुधीर कोचर ने स्थिति को संभालने के लिए टोकन सिस्टम को और प्रभावी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, “हमारी कोशिश है कि हर किसान को समय पर खाद मिले। आपूर्ति बढ़ाने के लिए राज्य सरकार और केंद्र से बात की जा रही है।” इसके अलावा, जिला प्रशासन ने कालाबाजारी रोकने के लिए निजी दुकानों और वितरण केंद्रों पर छापेमारी की योजना बनाई है।

दमोह में खाद की कमी और वितरण में अव्यवस्था ने किसानों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है। हाइब्रिड मक्का की खेती पर निर्भर किसानों के लिए समय पर खाद न मिलना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खाद की आपूर्ति जल्दी नहीं बढ़ाई गई, तो मक्का की पैदावार पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे जिले की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि खाद की आपूर्ति बढ़ाई जाए और वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए। कुछ किसानों ने ऑनलाइन टोकन सिस्टम या आधार-लिंक्ड वितरण की मांग भी की है ताकि अव्यवस्था और कालाबाजारी को रोका जा सके।

निष्कर्ष

दमोह में मंगलवार को एमपी स्टेट एग्रो कार्यालय में खाद वितरण के दौरान हुई अव्यवस्था ने एक बार फिर प्रशासनिक कमियों को उजागर किया है। हाइब्रिड मक्का की बढ़ती खेती के कारण खाद की मांग में वृद्धि और आपूर्ति की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रशासन द्वारा टोकन सिस्टम लागू करना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन जब तक आपूर्ति में सुधार और कालाबाजारी पर रोक नहीं लगती, किसानों की परेशानियां कम होने की उम्मीद कम है। जिला प्रशासन और सरकार को तत्काल कदम उठाकर इस संकट का समाधान करना होगा ताकि किसानों की मेहनत और फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।

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