सागर, मध्य प्रदेश: सागर जिले के कलेक्टर संदीप जी.आर. के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग ने फसल बीमा राशि के भुगतान में देरी और लापरवाही के चलते एक बार फिर गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह मामला 2009 से शुरू हुआ, जब राहतगढ़ तहसील के पीपरा गांव के किसानों—रविंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह और संग्राम सिंह—ने फसल बीमा से संबंधित शिकायत जिला उपभोक्ता आयोग में दर्ज की थी। इस मामले में लंबे समय से भुगतान लंबित होने के कारण कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

मामला क्या है?
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष और परिवादी के वकील जितेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि यह मामला 2009 में पीपरा गांव के तीन किसानों द्वारा दायर फसल बीमा से संबंधित शिकायत से शुरू हुआ था। उनकी अपील के बाद 2014 में राज्य उपभोक्ता आयोग ने कलेक्टर को बीमा राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद, भुगतान में बार-बार देरी हुई। 2017 से यह मामला वसूली के लिए विचाराधीन है।
कलेक्टर को कई बार नोटिस जारी किए गए, और उनके अधीनस्थ अधिकारी और कर्मचारी कोर्ट में पेश हुए। हालांकि, बीमा राशि जमा करने में लगातार टालमटोल की गई। इसके परिणामस्वरूप जिला उपभोक्ता आयोग की डबल बेंच, जिसमें न्यायाधीश आर.के. कोष्ठा और अनुभा वर्मा शामिल हैं, ने सख्त कदम उठाते हुए कलेक्टर संदीप जी.आर. के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया।

4 लाख जमा, 70 हजार अभी बाकी
पिछले वारंट के बाद प्रशासन हरकत में आया और 4 लाख रुपये की राशि न्यायालय में जमा की गई। लेकिन, 4 लाख 70 हजार रुपये की कुल राशि में से शेष 70 हजार रुपये अभी तक जमा नहीं किए गए हैं। अधिवक्ता जितेंद्र सिंह के अनुसार, अधिकारी शेष राशि जमा करने में आनाकानी कर रहे हैं। हर पेशी पर अधिकारी अगली तारीख पर राशि जमा करने का वादा करते हैं, लेकिन अगली सुनवाई में उपस्थित नहीं होते। इस लापरवाही के कारण कोर्ट ने 28 अगस्त 2025 को कलेक्टर के खिलाफ फिर से गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
प्रशासन में हड़कंप
गिरफ्तारी वारंट जारी होने की खबर से सागर जिले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने फाइलें खंगालनी शुरू कर दी हैं, और अगली सुनवाई 26 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि बकाया 70 हजार रुपये जमा किए जाएं, अन्यथा सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर संदीप जी.आर. का कार्यकाल
संदीप जी.आर. को अगस्त 2024 में सागर जिले का कलेक्टर नियुक्त किया गया था, जब उनके पूर्ववर्ती कलेक्टर को एक हादसे के बाद हटा दिया गया था। उनके कार्यकाल में प्रशासनिक लापरवाही के कई मामले सामने आए हैं, जिसमें सरकारी कर्मचारियों पर लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 के तहत समय पर काम न करने के लिए जुर्माना भी लगाया गया है।
किसानों का दर्द
यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि उन किसानों के दर्द को भी सामने लाता है, जो वर्षों से अपने हक की बीमा राशि के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अधिवक्ता जितेंद्र सिंह ने कहा, “किसानों के हितों की रक्षा के लिए हम कोर्ट में हर संभव प्रयास करेंगे। प्रशासन को इस मामले में गंभीरता दिखानी होगी।”
निष्कर्ष
सागर कलेक्टर संदीप जी.आर. के खिलाफ बार-बार गिरफ्तारी वारंट जारी होना प्रशासनिक व्यवस्था की खामियों को दर्शाता है। कोर्ट का यह कड़ा रुख यह संदेश देता है कि कानून के सामने कोई भी जवाबदेह से बच नहीं सकता। अब यह देखना होगा कि 26 सितंबर की सुनवाई में प्रशासन बकाया राशि जमा करता है या मामला और गंभीर मोड़ लेता है।