शिक्षक दिवस पर शिक्षा, संस्कार और सेवा का अनूठा संगम !

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शिक्षक दिवस का अवसर केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षा के महत्व और समाज में शिक्षकों की भूमिका को याद करने का दिन है। इसी पावन अवसर पर सागर स्थित पं. रविशंकर शुक्ल शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में एक भव्य और प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केवल औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें शिक्षा की गहनता, सेवा की भावना और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम देखने को मिला।


शिक्षा और गुरु की महत्ता पर संवाद

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षकों ने शिक्षा और शिक्षक की भूमिका पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए।

  • श्री सुमित सिंह राठौड़ ने कहा – “शिक्षक का सम्मान घर से प्रारंभ होता है। माता-पिता का धैर्य, संवेदनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण ही बच्चे को सही दिशा प्रदान करता है।”
  • श्री अशोक पटेल ने अपनी कविता “शिक्षक की गोद में उत्थान पलता है” सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
  • श्रीमती पूजा खरे ने कहा कि “हम बेटियों को शिक्षित कर रहे हैं, जो दोनों कुलों को रोशन करती हैं।”
  • श्रीमती स्वाति चौकसे ने कविता के माध्यम से कहा कि “शिक्षक देश की आन-बान-शान हैं।”
  • श्रीमती रिंकी राठौर ने गीत “हिम्मत हारे मत बैठो” प्रस्तुत किया।
  • श्रीमती मीनाक्षी पटैल ने भारत के महान दार्शनिक और शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं।

इन विचारों और प्रस्तुतियों ने छात्राओं के मन में शिक्षा और गुरु-शिष्य संबंध की महत्ता को और गहराई से स्थापित किया।


जरूरतमंद छात्राओं को गणवेश का वितरण

शिक्षक दिवस को विशेष बनाते हुए विद्यालय के शिक्षकों ने एक उदाहरणीय पहल की। जिन छात्राओं को गणवेश की आवश्यकता थी, उन्हें गणवेश वितरित किए गए। गणवेश पाकर छात्राओं के चेहरों पर प्रसन्नता झलक उठी। यह कदम केवल औपचारिकता नहीं था, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और शिक्षा में समानता का प्रतीक था।


“एक पेड़ मां के नाम” अभियान – 535 पौधों का रोपण

शिक्षक दिवस के अवसर पर विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण को भी एक नया आयाम मिला। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत छात्राओं ने 535 पौधों का रोपण किया। यह गतिविधि न केवल पर्यावरण संतुलन की दिशा में सार्थक प्रयास था बल्कि मातृत्व और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण भी प्रस्तुत किया। इस अभियान से छात्राओं ने यह संदेश दिया कि सच्ची शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी माध्यम है।


अतिथियों का सम्मान और प्रेरणादायी संदेश

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती मां के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ। तत्पश्चात डॉ. राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर विद्यालय प्राचार्य डॉ. महेंद्र प्रताप तिवारी, प्रभारी शिक्षिका श्रीमती मालिनी जैन, श्रीमती रंजीता जैन और श्रीमती सरोज जैन ने बी.ई.ओ. श्री मनोज तिवारी, बी.आर.सी. श्री अनिरुद्ध डिम्हा, बी.ए.सी. श्री राघवेन्द्र, रिटा. प्र.अ. शिक्षक श्री महेश सिंह ठाकुर, शिक्षिका श्रीमती चंद्रवती चौरसिया एवं प्रभारी प्र.अ. शासकीय मा.शा.क. बड़ा बाजार का शाल, श्रीफल और पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया।

  • बी.ई.ओ. श्री मनोज तिवारी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा – “आपका विद्यालय संभाग में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। जितने लैपटॉप इस विद्यालय की छात्राओं को मिले हैं, उतने अन्य किसी विद्यालय को नहीं मिले।”
  • बी.आर.सी. श्री अनिरुद्ध डिम्हा ने कहा – “गुरु मनुष्य के भीतर मनुष्यता और पालन-पोषण का कौशल विकसित करता है।”
  • जन. शिक्षक श्री ओ.पी. श्रीवास्तव ने शिक्षक को “आध्यात्मिक गुरु और मार्गदर्शन की कड़ी” बताया, जो केवल वेतन के लिए नहीं बल्कि सेवा भाव से कार्य करता है।

शिक्षक राष्ट्र का सुदृढ़ स्तंभ

प्राचार्य डॉ. महेंद्र प्रताप तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा –
“शिक्षक राष्ट्र का सुदृढ़ स्तंभ होते हैं, जिस पर राष्ट्र की पूरी इमारत खड़ी होती है। शिक्षक का पद नौकरी तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा कार्य है। शिक्षक किसी राष्ट्र रक्षक से कम नहीं। गुरू तो ऐसा चाहिए शिष्य से कुछ न ले, और शिष्य ऐसा होना चाहिए जो गुरू को सब कुछ दे।”

यह संदेश उपस्थित सभी छात्राओं और शिक्षकों के लिए गहरी प्रेरणा का स्रोत बना।


छात्राओं की प्रस्तुतियाँ – गुरु वंदना और भाषण

कार्यक्रम के सांस्कृतिक पक्ष ने इसे और अधिक रंगीन और भावनात्मक बना दिया।

  • छात्राओं यशिका रजक, अमृता यादव, महक अहिरवार, जया अहिरवार और दीक्षा प्रजापति ने सरस्वती वंदना और गुरुओं के सम्मान में समूह गीत प्रस्तुत किया।
  • छात्राओं कीर्ति दांगी, रोहणी अहिरवार और गुनगुन कोटवानी ने डॉ. राधाकृष्णन के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रभावी भाषण दिए।

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