भोपाल के अनंतपुरा कोकता में अवैध कॉलोनी पर ‘मछली’ कनेक्शन का शक;

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भोपाल के अनंतपुरा कोकता क्षेत्र में एक अवैध कॉलोनी की जांच में ‘मछली’ परिवार का सीधा दखल होने का शक जताया जा रहा है। यह कॉलोनी सरकारी जमीन पर बनी हुई है और टीएंडसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) से अप्रूव्ड नहीं है। सूत्रों के अनुसार, इस कॉलोनी में प्लॉट मुख्य रूप से एक ही समुदाय के लोगों को बेचे गए हैं। यदि जांच में आरोप सही साबित हुए, तो जिला प्रशासन एक बार फिर ‘मछली’ परिवार पर सख्त कार्रवाई कर सकता है। पिछले दिनों पशुपालन विभाग की 65 एकड़ जमीन के सीमांकन के दौरान यह जानकारी सामने आई है। कॉलोनी को ‘लेक सिटी’ नाम से विकसित किया जा रहा है और कई प्लॉट पहले ही बेचे जा चुके हैं।

जांच में सामने आई अवैध कॉलोनी की हकीकत

पशुपालन विभाग की जमीन पर कब्जे की शिकायत के बाद प्रशासन ने सीमांकन कराया, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में 4 कॉलोनी गेट, सड़कें, पार्क, 20 मकान, एक प्राइवेट स्कूल, शादी हॉल/रिसोर्ट, 1 एकड़ पर खेती, फार्म हाउस और पक्के निर्माण शामिल हैं। इसके अलावा, 130 डेसीमल भूमि पर अवैध खेती भी पाई गई है। सीमांकन में नगर निगम की 50 दुकानें, पेट्रोल पंप, एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट), 5 एकड़ पर कृषि कार्य और 200 फीट कोकता बायपास का निर्माण भी सामने आया है।

सूत्रों का कहना है कि ‘मछली’ परिवार का इस कॉलोनी में सीधा हस्तक्षेप है। परिवार के सदस्यों पर पहले से ही ड्रग्स और रेप केस में कार्रवाई चल रही है, जिसमें दो सदस्य जेल में हैं। हाल ही में प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बने 7 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया था, जिनकी कीमत सवा सौ करोड़ रुपये आंकी गई थी। अब इस नई कॉलोनी के मामले में भी परिवार का नाम जुड़ने से जांच तेज हो गई है।

नोटिस देने की कार्रवाई आज से शुरू

कब्जे वाली जमीन पर सोमवार (8 सितंबर 2025) से नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा इस कार्रवाई को अंजाम देंगे। पहले पशुपालन विभाग नोटिस जारी करने वाला था, लेकिन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के आदेश के बाद तहसीलदार को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। सूत्रों के मुताबिक, सबसे पहले कमर्शियल कब्जों पर कार्रवाई होगी। नगर निगम की दुकानों को लेकर सरकारी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, जिससे दुकानें तोड़ने की नौबत नहीं आएगी।

पिछले सप्ताह बुधवार को सीमांकन रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी गई थी। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि किस रकबे पर किसका और कितना कब्जा है। अब चिन्हित कब्जाधारियों को पशुपालन विभाग से नोटिस भेजे जाएंगे।

सीमांकन की प्रक्रिया और घटनाक्रम

यह सीमांकन 34 साल बाद किया गया, जिसका मुख्य कारण ‘मछली’ परिवार पर चल रही कार्रवाई है। 27 अगस्त को गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव, तहसीलदार सौरभ वर्मा की मौजूदगी में 11 पटवारी और 3 राजस्व निरीक्षकों ने सीमांकन शुरू किया। तीन दिनों में कार्य पूरा हो गया और रिपोर्ट एसडीएम तथा तहसीलदार को सौंपी गई।

2 सितंबर को डायमंड सिटी समेत आसपास के कई निवासी एसडीएम ऑफिस पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि उन्होंने सारे दस्तावेज देखकर ही जमीन खरीदी थी। प्रशासन ने रजिस्ट्री, नामांतरण और बंटवारे की प्रक्रिया की थी, और बैंकों से लोन भी मिला था। अब अचानक इसे कब्जा बताया जा रहा है।

3 सितंबर को रिपोर्ट कलेक्टर को पेश की गई। पशुपालन विभाग ने एसडीएम और तहसीलदार को आवेदन देकर सीमांकन की मांग की थी, जिसमें कहा गया कि उनकी जमीन पर कब्जा हो सकता है। जांच में कब्जे की पुष्टि हुई, जिसके बाद ‘मछली’ परिवार समेत 20 लोगों को नोटिस दिए गए। सीमांकन के दौरान इन्हें मौजूद रहने को कहा गया था, लेकिन परिवार की ओर से वकीलों ने अपना पक्ष रखा और कब्जे से इनकार किया।

‘मछली’ परिवार पर पहले से कार्रवाई

‘मछली’ परिवार पर ड्रग्स और रेप केस में कार्रवाई चल रही है। 30 जुलाई और 21 अगस्त को प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया था। अब इस नई कॉलोनी के मामले में यदि परिवार का कनेक्शन साबित हुआ, तो आगे की कार्रवाई और तेज हो सकती है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

निवासियों की चिंता और प्रशासन की भूमिका

कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि वे निर्दोष हैं और दस्तावेजों के आधार पर जमीन खरीदी थी। वे अब नोटिस और संभावित कार्रवाई से चिंतित हैं। प्रशासन का दावा है कि जांच निष्पक्ष होगी और केवल अवैध कब्जों पर ही कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन की रक्षा प्राथमिकता है।

इस मामले ने भोपाल में अवैध कॉलोनियों और सरकारी जमीन पर कब्जों के मुद्दे को फिर से गरमा दिया है। आने वाले दिनों में नोटिस और कार्रवाई से इस क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रशासन की नजर अब ‘लेक सिटी’ और ‘डायमंड सिटी’ जैसी कॉलोनियों पर टिकी हुई है।

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