वैश्विक चुनौतियों का समाधान और भारतीय दृष्टिकोण पर होगा विमर्श !

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युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है। इसी दृष्टि से आगामी 11 सितम्बर को सागर के महाकवि पद्माकर सभागार में युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। कार्यक्रम का विषय है – “वैश्विक चुनौतियों का समाधान और भारतीय दृष्टिकोण”। इस अवसर पर युवाओं का मार्गदर्शन नर्मदा पुत्र संत पूज्य समर्थ दादा गुरु जी, यंग थिंकर्स फोरम के निदेशक एवं ओजस्वी वक्ता श्री आशुतोष जी तथा रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनोद मिश्र करेंगे।

यह आयोजन पूर्णतः अराजनैतिक और सामाजिक स्वरूप का होगा। इसका उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रवाद, राष्ट्रीयता और जिम्मेदारी की भावना को जागृत करना तथा उन्हें वैश्विक और भारतीय समस्याओं के समाधान की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार करना है।


बैठक में बनी रूपरेखा

कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर रविवार को दीपाली सभाकक्ष में बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता युवा नेता अविराज सिंह ने की। बैठक में मंच संचालन जय दुबे ने किया, स्वागत भाषण आकाश जैन सीपुर ने दिया तथा प्रतीक चौकसे ने आभार व्यक्त किया।

बैठक में अविराज सिंह ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और साथ ही सबसे बड़ी युवा आबादी भी हमारे पास है। यदि भारत के युवा केवल दर्शक बने रहें तो समस्याएँ ज्यों की त्यों बनी रहेंगी, लेकिन यदि वही युवा समाधानकर्ता बन जाएँ तो वैश्विक चुनौतियों के उत्तर भारत से निकल सकते हैं।


स्वामी विवेकानंद के संदेश से जुड़ाव

अविराज सिंह ने कहा कि 11 सितम्बर का दिन ऐतिहासिक महत्व रखता है। ठीक 132 वर्ष पहले, 11 सितम्बर 1893 को शिकागो की धर्मसभा में स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म, भारतीय संस्कृति और विश्व मानवता पर अपने विचार रखकर भारत की छवि को पूरे विश्व में स्थापित किया था। उनके उस भाषण से भारत की आवाज वैश्विक मंच तक पहुँची। इसी प्रेरणा के आधार पर 11 सितम्बर को यह युवा संवाद आयोजित किया जा रहा है ताकि युवा वर्ग फिर से नए विचारों और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े।


राष्ट्रवाद और वोकल फॉर लोकल पर जोर

अपने उद्बोधन में अविराज सिंह ने कहा कि युवाओं को राष्ट्रवादी सोच के साथ अपने देश के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए। भारत विश्व का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है और इसमें भारतीय ब्रांडों को आगे लाना अत्यंत आवश्यक है। विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम कर यदि हम “वोकल फॉर लोकल” को अपनाएँ तो देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केवल गणेश उत्सव से ही 40,000 करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था जुड़ी हुई है। यदि हम नवरात्र, दीपावली और अन्य त्योहारों में स्थानीय व देशी उत्पादों का प्रयोग करें तो यह सीधा-सीधा देश की आर्थिक मजबूती और स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त करेगा।


वैश्विक चुनौतियों पर भारतीय समाधान

कार्यक्रम में यह विमर्श होगा कि आज दुनिया जिन समस्याओं से जूझ रही है – जैसे जलवायु परिवर्तन, ट्रेड वार, टैरिफ वार, बेरोजगारी, सांस्कृतिक संघर्ष और आर्थिक असमानता – उनके समाधान भारतीय दृष्टिकोण से कैसे संभव हो सकते हैं।

अविराज सिंह ने कहा कि दुनिया ने उपभोक्तावाद और भौतिकवाद की दिशा में बहुत तेजी से प्रगति की है, लेकिन इसके कारण असमानताएँ और संघर्ष बढ़े हैं। भारत की संस्कृति हमेशा से संतुलन, सहयोग, सहअस्तित्व और “वसुधैव कुटुंबकम्” की रही है। यही दृष्टिकोण वैश्विक चुनौतियों का स्थायी समाधान दे सकता है।


युवाओं से अपेक्षा – केवल सुनना नहीं, करना भी है

बैठक में उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल व्याख्यान सुनने तक सीमित न रहें, बल्कि समस्याओं पर लेखन करें, भाषण दें और ठोस समाधान खोजें। यही इस कार्यक्रम का उद्देश्य है कि युवाओं में मौलिक चिंतन को प्रोत्साहित किया जाए और उन्हें सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि भारतीय युवा विदेशी सिटिजनशिप लेने की बजाय अपने देश में ही कार्य करें, तो भारत का टैलेंट भारत में ही रुकेगा और यह राष्ट्र की उन्नति का आधार बनेगा।


कार्यक्रम में व्यापक भागीदारी

दीपाली सभाकक्ष में आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से –
आदित्य घोषी, आदित्य प्रखर तिवारी, कमल सिंह दांगी, संदीप सिंह कर्रापुर, संजीव सिंह दांगी, सचिन सिंह सागोनी, सूर्यांश तिवारी, श्रीराम रिछारिया, आकाश सिंह गोदना, लोकेश राज, ऋषि राजा बुंदेला, ऋषि सवलोक, राजवीर सिंह शाहपुर, पुष्पेन्द्र सिंह रारोन, आकाश गोदना बीना, सचिन ठाकुर सागौनी, गोलू राय मालथौन, संदीप साहू, रितिक खुरई, मोहित साहू, सत्यम ठाकुर, राजवीर, आलोक, पुष्पेन्द्र मालथौन, आशीष पांडे, रामराजा, अभिषेक सिंह कर्रापुर, अजीत सिंह चीलपहाड़ी, सौरभ सिंह बंडा, कौशल सिंह बंडा सहित अनेक युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


11 सितम्बर को होने वाला यह युवा संवाद कार्यक्रम केवल एक संगोष्ठी नहीं, बल्कि युवाओं के लिए आत्मचिंतन और राष्ट्रचिंतन का अवसर है। इसमें न केवल वैश्विक चुनौतियों की चर्चा होगी, बल्कि भारतीय दृष्टिकोण से उनके समाधान पर भी गहन विमर्श होगा।

युवा नेता अविराज सिंह का कहना है कि यह आयोजन भारत के युवाओं को यह संदेश देगा कि वे केवल दर्शक नहीं, बल्कि परिवर्तन के वाहक बनें। स्वामी विवेकानंद के संदेशों और भारतीय संस्कृति की शिक्षाओं के आधार पर ही विश्व को दिशा दी जा सकती है और यही इस आयोजन का मूल उद्देश्य है।

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