सागर, 8 सितंबर 2025: बीना में आवारा मवेशियों की समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा कम होने का नाम नहीं ले रहा। खुरई रोड और कुरवाई रोड जैसी मुख्य सड़कों से लेकर ढूरुआ, बारधा, और किर्राबदा जैसी ग्राम पंचायतों तक, मवेशियों की मौजूदगी यातायात को बाधित कर रही है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा रही है। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

मुख्य सड़कों पर मवेशियों का कब्जा
बीना के शहरी क्षेत्रों में खुरई रोड और कुरवाई रोड पर मवेशी दिन-रात सड़कों पर बैठे रहते हैं, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। नगरपालिका क्षेत्र में आयोजनों के दौरान भी मवेशी भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पहुंच जाते हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में ढूरुआ, बारधा, और किर्राबदा पंचायतों में भी यही हाल है, जहां सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा आम बात हो गई है। यह न केवल यातायात को बाधित करता है, बल्कि स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है।

दुर्घटना का खतरा और वाहन चालकों की परेशानी
सड़कों पर अचानक आने वाले मवेशियों के कारण वाहन चालकों को दुर्घटना का खतरा बना रहता है। खासकर रात के समय, जब मवेशी सड़कों पर बैठे होते हैं, तो कम दृश्यता के कारण हादसों की संभावना और बढ़ जाती है। ट्रक चालकों और दोपहिया वाहन चालकों ने बताया कि मवेशियों के अचानक सड़क पर आने से वाहन नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है, जिससे कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
कलेक्टर के निर्देशों की अनदेखी
जिला कलेक्टर ने नगरपालिका और ग्राम पंचायतों को आवारा मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए थे। इनमें मवेशियों को सड़कों से हटाने, गौशालाओं में उनके रखरखाव की व्यवस्था करने, और पशु मालिकों पर सख्त कार्रवाई करने जैसे कदम शामिल थे। बावजूद इसके, नगरपालिका और संबंधित पंचायतों ने इन निर्देशों पर अमल करने में लापरवाही बरती है। बिलासपुर में भी इसी तरह की समस्या के चलते हाई कोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाई थी, और सागर जिले में भी ऐसी स्थिति बन रही है।

स्थानीय निवासियों की चेतावनी और मांग
बीना के स्थानीय निवासियों ने आवारा मवेशियों की समस्या को लेकर गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि नगरपालिका और पंचायतों की उदासीनता के कारण यह समस्या लगातार बढ़ रही है। निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सड़कों पर मवेशियों के कारण कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि नगरपालिका और ग्राम पंचायतों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सड़कें मवेशी-मुक्त हो सकें और यातायात सुरक्षित हो।
निवासियों ने यह भी सुझाव दिया कि गौशालाओं की क्षमता बढ़ाई जाए, मवेशियों को पकड़ने के लिए विशेष वाहनों का उपयोग किया जाए, और पशु मालिकों पर जुर्माना लगाकर उन्हें अपने मवेशियों को सड़कों पर छोड़ने से रोका जाए। कुछ सामाजिक संगठनों ने जनआंदोलन की चेतावनी भी दी है, यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की।

प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
नगरपालिका और ग्राम पंचायतों की लापरवाही के कारण बीना में आवारा मवेशियों की समस्या अनियंत्रित हो रही है। उत्तरकाशी में भी इसी तरह की स्थिति के कारण स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर सवाल उठाए थे, जहां गौ सेवा सदन होने के बावजूद मवेशियों को आश्रय नहीं मिल रहा। बीना में भी गौशालाओं की अपर्याप्त क्षमता और रखरखाव की कमी इस समस्या को बढ़ा रही है।
निष्कर्ष
बीना में आवारा मवेशियों की समस्या न केवल यातायात के लिए खतरा बन रही है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी परेशानी का सबब है। कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद नगरपालिका और पंचायतों की निष्क्रियता इस समस्या को और गंभीर बना रही है। जिला प्रशासन को इस दिशा में तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि सड़कें सुरक्षित हो सकें और दुर्घटनाओं को रोका जा सके। स्थानीय निवासियों की मांग और चेतावनी को देखते हुए, प्रशासन को गौशालाओं की व्यवस्था को मजबूत करने और पशु मालिकों पर सख्ती करने जैसे ठोस उपाय करने होंगे।