ग्वालियर, 8 सितंबर 2025: ग्वालियर साइबर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए इसके सरगना मनीष गुप्ता (31) और उसके साथी दीपक कुमार (24) को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाला खुलासा यह है कि मनीष ने बिहार के छपरा में ठगी सिखाने वाले एक इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षण लिया था, जहां से उसने ठगी के तौर-तरीके सीखे। इसके बाद उसने बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के 25 से अधिक शहरों में कॉल सेंटर का नेटवर्क स्थापित कर करोड़ों रुपये की ठगी की। मनीष और दीपक, जो केवल 12वीं पास हैं, ने इंजीनियरों और कंपनी अधिकारियों जैसे पढ़े-लिखे लोगों को अपने जाल में फंसाया। 6 सितंबर को गिरफ्तारी के बाद दो दिन की रिमांड पूरी होने पर दोनों को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा।

छपरा में ठगी का प्रशिक्षण, बनाया विशाल नेटवर्क
पुलिस पूछताछ में मनीष गुप्ता ने बताया कि उसने छपरा, बिहार में एक ऐसे इंस्टीट्यूट से ठगी की ट्रेनिंग ली, जहां लोगों को ठगी के तरीके सिखाए जाते हैं। इस प्रशिक्षण के आधार पर उसने पांच राज्यों—बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान—में 25 से अधिक शहरों में अपना नेटवर्क फैलाया। इस नेटवर्क में कॉल सेंटर स्थापित किए गए, जिनके जरिए लोगों को फर्जी फ्रेंचाइजी ऑफर और अन्य लुभावने प्रस्ताव देकर ठगा जाता था। मनीष ने बेरोजगार ग्रेजुएट युवाओं को 15,000 रुपये मासिक वेतन पर नौकरी दी और उनके बैंक खातों व आधार कार्ड का इस्तेमाल ठगी के लिए किया।
कैडबरी फ्रेंचाइजी के नाम पर ठगी
मध्यप्रदेश साइबर सेल के डीएसपी संजीव नयन शर्मा ने बताया कि ग्वालियर निवासी प्रदीप सेन ने एक साल पहले शिकायत दर्ज की थी, जिसमें उन्हें कैडबरी चॉकलेट कंपनी की फ्रेंचाइजी के नाम पर 5.70 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया था। प्रदीप ने इंटरनेट पर कैडबरी फ्रेंचाइजी के लिए सर्च किया था, जिसके एक घंटे बाद उनके पास एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को कंपनी का अधिकारी बताकर फ्रेंचाइजी की प्रक्रिया समझाई और डिपॉजिट के नाम पर 5.70 लाख रुपये उनके खाते में जमा करवा लिए। इसी तरह दिल्ली में एक कारोबारी से 20 लाख रुपये की ठगी की गई। पूछताछ में मनीष ने कबूल किया कि इस गिरोह ने चॉकलेट कंपनियों की फ्रेंचाइजी के नाम पर सबसे अधिक लोगों को निशाना बनाया।

गूगल पर फर्जी नंबर और रिक्वेस्ट फॉर्म
गिरोह का ठगी का तरीका बेहद सुनियोजित था। वे बड़ी-बड़ी कंपनियों के नाम पर गूगल पर फर्जी नंबर और रिक्वेस्ट फॉर्म अपलोड करते थे। जब कोई व्यक्ति फ्रेंचाइजी या कस्टमर सर्विस सेंटर की जानकारी सर्च करता, तो फर्जी फॉर्म खुलता, जिसमें भरे गए डेटा सीधे ठगों तक पहुंच जाते। इसके बाद मनीष और उसके साथी खुद को कंपनी के अधिकारी के रूप में पेश करते और लोगों को लुभावने ऑफर देकर ठग लेते। इस नेटवर्क में फर्जी सिम कार्ड और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पहचान छिपाई जाती थी।
20 मिनट में निकाल लिया जाता था पैसा
गिरोह ने पांचों राज्यों में एजेंट्स का नेटवर्क बनाया था, जो ठगी से प्राप्त रकम को विभिन्न बैंक खातों में जमा करवाते थे। पुलिस के अनुसार, रकम जमा होने के 20 मिनट के भीतर ही एटीएम के जरिए पूरा पैसा निकाल लिया जाता था। इसके लिए फर्जी दस्तावेजों और सिम कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था। मनीष ने बेरोजगार युवाओं के बैंक खाते और आधार कार्ड का उपयोग कर लाखों रुपये के लेन-देन किए, जिससे ठगी का पैसा ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था।

एक साल की ट्रैकिंग के बाद गिरफ्तारी
ग्वालियर साइबर पुलिस ने इस गिरोह पर लगभग एक साल तक नजर रखी। विभिन्न आईपी एड्रेस और लोकेशन की ट्रैकिंग के बाद पुलिस ने दिल्ली से मनीष गुप्ता और दीपक कुमार को 6 सितंबर को गिरफ्तार किया। डीएसपी संजीव नयन शर्मा ने बताया कि पूछताछ में कई बड़े खुलासे हुए हैं, और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आएंगे। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को दो दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया था, और आज उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।
निष्कर्ष
ग्वालियर साइबर पुलिस की इस कार्रवाई ने एक संगठित अंतरराज्यीय ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो पढ़े-लिखे लोगों को भी अपने जाल में फंसाने में कामयाब रहा। बिहार के छपरा में ठगी सिखाने वाले इंस्टीट्यूट का खुलासा इस बात का संकेत है कि साइबर अपराध के तरीके कितने संगठित और जटिल हो चुके हैं। पुलिस की तत्परता और तकनीकी जांच ने इस गिरोह के सरगना को पकड़ने में सफलता हासिल की है, लेकिन यह घटना समाज में साइबर जागरूकता की आवश्यकता को रेखांकित करती है। लोगों को इंटरनेट पर सर्च किए गए ऑफर्स और कॉल्स पर सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि वे इस तरह की ठगी का शिकार होने से बच सकें।