भोपाल।
मध्यप्रदेश में खेल और खेल के नाम पर जारी किए गए हजारों हथियार व लाखों कारतूस के दुरुपयोग की संभावना ने प्रशासन को सख्ती करने पर मजबूर कर दिया है। हाल ही में भोपाल में करीब 80 शूटर्स का रिकॉर्ड खंगालने के बाद बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया कि इनमें से तीन शूटर्स ने अपने आपराधिक रिकॉर्ड छुपाए थे। अब जिला प्रशासन ने इनके लाइसेंस सस्पेंड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं, कारतूस के कोटे को 50% कम करने का सुझाव भी दिया गया है।

मछली परिवार पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी
जांच के दौरान मछली परिवार से जुड़े शूटर शाहिद अहमद का बंदूक लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया है। उसके पास मौजूद .32 बोर की रिवाल्वर, 12 बोर की सेमी ऑटोमैटिक गन और 30.06 राइफल जब्त कर ली गई हैं। शाहिद अहमद पर आपराधिक केस दर्ज पाए गए हैं। यही नहीं, मछली परिवार से जुड़े पांच अन्य लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त करने की तैयारी भी चल रही है।
चार दिन तक चला वेरिफिकेशन
अगस्त के आखिरी सप्ताह में चार दिन तक शूटर्स का वेरिफिकेशन अभियान चला। बैरागढ़ एसडीएम रविशंकर राय ने बताया कि तैयार रिपोर्ट कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को सौंपी जा रही है। इस रिपोर्ट में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं।
- कई शूटर्स ने सेल्फ डिफेंस के लिए मूल लाइसेंस लिया था, लेकिन बाद में उसे स्पोर्ट्स कैटेगरी में बदलकर 3-4 हथियार ले लिए।
- स्पोर्ट्स कोटे का कारतूस वास्तव में सेल्फ डिफेंस के लिए उपयोग किया जा रहा है।
- कई शूटर्स ऐसे हैं, जिन्होंने लंबे समय से किसी खेल प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन अब भी स्पोर्ट्स कैटेगरी के तहत हथियार व कारतूस रखे हुए हैं।
- कुछ ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बावजूद कारतूस की खपत का रिकॉर्ड नहीं दिया।
कारतूस कोटे में कटौती
जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया कि शूटर्स को दिए जा रहे लाखों कारतूस का वास्तविक उपयोग खेलों में नहीं होता। कई इंटरनेशनल स्तर के खिलाड़ियों को एक लाख तक का कोटा मिलता है, जबकि 50 हजार, 15 हजार और 10 हजार कोटे वाले खिलाड़ी भी हैं। लेकिन, खपत बेहद कम दर्ज है। इसलिए प्रशासन ने इनका कोटा 50% घटाने की अनुशंसा की है।

जांच क्यों हुई?
19 अगस्त को परवलिया थाना क्षेत्र के रसूलिया पठार में अवैध शूटिंग रेंज पर फायरिंग कराए जाने का मामला सामने आया था। इस मामले में शारीक बुखारी के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसके अलावा शाह आर्मरी की दुकान पर भी गड़बड़ियां मिलीं, जिसके चलते शासन से उसका लाइसेंस निरस्त करने की सिफारिश की गई है।
शूटर्स से मांगी गई थी ये जानकारी
प्रशासन ने हर शूटर से लिखित में जानकारी मांगी थी:
- शस्त्र लाइसेंस पर दर्ज कुल शस्त्रों की संख्या।
- पिछले 10 सालों में कितने दिन और किस शूटिंग रेंज में अभ्यास किया।
- अब तक कुल कितने कारतूस का उपयोग किया गया।
- कितने कारतूस नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया या डीलर्स से खरीदे गए।

महिला शूटर्स ने जांच को सराहा
भोपाल की शूटर बहनें सृष्टि और खुशी मिश्रा भी वेरिफिकेशन के लिए एसडीएम ऑफिस पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि यह जांच बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे असली खिलाड़ियों और अवैध हथियारों का फर्क साफ होगा।